बलिया। कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही के कारण जिले में इंटरमीडिएट के करीब पांच हजार परीक्षार्थियों की प्रायोगिक परीक्षा छूट गई। केंद्र निर्धारण के दौरान कॉलेजों की अदला-बदली होने से ऐसी नौबत पैदा हुई है। परीक्षार्थी अब परीक्षाफल को लेकर चिंतित हैं।
जिले में यूपी बोर्ड परीक्षा खत्म होने पर दूसरे चरण में 28 अप्रैल से चार मई तक प्रायोगिक परीक्षा कराई गई। बोर्ड परीक्षा में निर्धारित केंद्रों में से कई में विज्ञान आदि विषयों की मान्यता नहीं होने के कारण वहां के परीक्षार्थियों को आसपास के स्कूलों में प्रायोगिक परीक्षा के लिए भेजा गया। प्रायोगिक परीक्षा के लिए 174 केंद्र बनाए थे। कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही के कारण परीक्षार्थियों का केंद्रों से समन्वय नहीं हो पाया और भौतिक, रसायन, भूगोल, जीव विज्ञान आदि के तकरीबन पांच हजार परीक्षार्थी प्रायोगिक परीक्षा से वंचित रह गए हैं। परीक्षार्थी चिंतित हो गए हैं। उनका कहना है कि बोर्ड परीक्षा में जहां केंद्र था, वहां प्रैक्टिकल से जुड़े एक विषय की मान्यता थी जबकि अन्य दो-तीन विषयों की प्रायोगिक परीक्षाएं अलग-अलग कॉलेजों में जाकर देनी पड़ीं। कॉलेजों की अदला-बदली से तमाम छात्राएं परीक्षा में शामिल नहीं हो सकीं। उनको दो विषयों के प्रायोगिक परीक्षा की तिथि दी गई थी लेकिन तीसरे विषय की तिथि और कालेज का समय से पता ही नहीं चल पाया। प्रभारी जिला विद्यालय निरीक्षक अतुल तिवारी का कहना है कि करीब पांच हजार विद्यार्थी प्रायोगिक परीक्षा से वंचित रह गए हैं। उनकी प्रायोगिक परीक्षा कराने के लिए जल्द ही परिषद से तिथि निर्धारित की जाएगी।