साहित्यकार दूधनाथ सिंह के निधन के बाद उनके पैतृक गांव सोबंथा में शोकाकुल परिजन।
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प्रख्यात साहित्यकार एवं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रहे जनवादी लेखक दूधनाथ सिंह की स्मृति में ग्राम पंचायत गांव के सार्वजनिक स्थान पर उनकी प्रतिमा लगाएगी। साथ ही ग्राम द्वार का नाम भी उनके नाम पर रखा जाएगा। गुरुवार को इलाहाबाद में हुए निधन से परिवार और उनका गांव सोबंथा शोकाकुल है। जनपद के सोहांव विकास खंड सोबंथा गांव में 17 अक्तूबर 1936 को दूधनाथ सिंह का जन्म किसान परिवार में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही नरही प्राथमिक विद्यालय एवं जूनियर हाईस्कूल में हुई थी। बाकी पढ़ाई इलाहाबाद में हुई थी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में ही प्रोफेसर पद पर नियुक्ति हुई। वह निराला, सुमित्रानंदन पंत एवं महादेवी वर्मा के काफी करीबी रहे। इनके द्वारा लिखे गए आखिरी कलाम, लौट आ ओ धार, धर्मक्षेत्र-कुरूक्षेत्र, आत्महंता-अस्था जैसी कालजयी कृतियों की रचना की थी। उनके तीन कविता संग्रह भी प्रकाशित है। दूधनाथ सिंह के निधन की खबर से परिवारवाले और ग्रामीण शोक में डूबे रहे। सोबंथा ग्राम के प्रधान ईश्वर दयाल ने कहा कि दूधनाथ सिंह की यादों को कायम रखने के लिए ग्राम पंचायत उनके नाम पर द्वार तथा सार्वजनिक स्थल पर उनकी प्रतिमा लगवाएगी।
उधर, बलिया नगर में अखिल भारतीय विकास संस्कृति साहित्यिक परिषद के आनंद नगर स्थित कार्यालय पर शोक सभा का आयोजन किया गया। इस मौके पर डा. भोला प्रसाद आग्नेय, डा. फतेहचंद्र बेचैन, डा. आदित्य कुमार, राधिका तिवारी, सुनील कुमार ओझा, संतोष गुप्ता, नंदजी नंदा, बेचू राम आदि मौजूद रहे। भरौली में गड़हा विकास मंच के कैंप कार्यालय पर शोक सभा का आयोजन किया गया। दो मिनट का मौन रखकर शोक व्यक्त किया गया। सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष गायक एवं अभिनेता गोपाल राय, चन्द्रमणि राय अध्यक्ष गड़हा विकास मंच, विजेन्द राय महासचिव, रणविजय राय ग्रामप्रधान, डा सुनील तिवारी, सुशील राय अध्यक्ष किसान मोर्चा बक्सर, हरेराम राय ने श्रद्धांजलि दी।