श्रीरामलीला समिति के तत्वावधान में बिचला पोखरा स्थित मंच पर श्रीराम राज्याभिषेक का मंचन किया गया। श्रीराम को राजगद्दी मिलते ही अयोध्या में खुशियां मनाई गईं। संपूर्ण अयोध्या जश्न में डूब गई। चौदह वर्ष के वनवास से अयोध्या लौटने के बाद राम को राजगद्दी देने की तैयारी होने लगी।
गुरू वशिष्ठ ने शुभ मुर्हूत निकाला तथा दरबार में राम को धार्मिक अनुष्ठानों के साथ तिलक लगाकर राज्याभिषेक किया गया। राज दरबार में मौजूद हनुमान, विभीषण और अन्य बानर योद्धाओं को सम्मानित किया गया। इस दौरान ने रत्न जड़ित माला उपहार स्वरूप सीता को प्रदान किया। सीता ने राम द्वारा दी गई माला हनुमान को उपहार में दे दिया। हनुमान ने माला को तोड़ना शुरू कर दिया।
यह देख सभी दरबारी चौंक पड़े तथा हनुमान से माला तोड़ने का कारण पूछा। हनुमान ने कहा कि माला में राम नाम खोज रहा हूं। जिस वस्तु में राम नहीं है वह भला मेरे किस काम की है। इस पर दरबारियों ने हनुमान से पूछा कि क्या तुम्हारे हृदय में राम निवास करते हैं, तो हनुमान ने हामी भर दी तथा भरे दरबार में अपना सीना फाड़ सभी को सीताराम का दर्शन कराया।
हनुमान के हृदय में सीता राम को देख दरबारी प्रफूल्लित हो गए तथा हनुमान की राम भक्ति की प्रसंन्नता करते हुए जयकारे लगाए। हंसी-खुशी माहौल में राम ने मित्रों, शुभचिंतकों और याचकों का यथोचित सम्मान करते हुए उपहार प्रदान किया। अयोध्या में चहुंओर खुशियां मनाई गई तथा जमकर आतिशबाजी की। स्व. राजाराम वर्मा व्यास द्वारा लिखित रामायण के आधार पर निदेशक वृजकिशोर आजाद की देखरेख में प्रदर्शित लीला का मंचन देख लीलाप्रेमी भावविभोर हो गए। लीलाध्यक्ष विनय प्रकाश डेविड ने लीलाप्रेमियों के प्रति आभार प्रकट किया।