अस्पताल के तीन फजिशियन की ओपीडी में 264 मरीजों ने इलाज कराया। सांस, वायरल फीवर के अलावा पेट दर्द, गैस व डायरिया के मरीज ज्यादा रहे। जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. पंकज झा ने बताया कि उपवास के दौरान शरीर हल्के और सीमित आहार का अभ्यस्त हो जाता है। ऐसे में शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और पाचन तंत्र भी संवेदनशील हो जाता है।
अगर इस दौरान अचानक अधिक तेल, मसाले और प्रोटीनयुक्त भारी भोजन लिया जाए तो पेट में गड़बड़ी होना स्वाभाविक है। इससे एसिडिटी, गैस, अपच, उल्टी-दस्त और कई बार फूड प्वाइजनिंग तक की समस्या हो सकती है।
डॉ. रितेश सोनी ने कहा कि लोग व्रत खत्म होते ही अपनी पसंदीदा चीजें अधिक मात्रा में खाने लगते हैं, जिससे शरीर पर अचानक दबाव बढ़ जाता है। उपवास के बाद सामान्य भोजन की ओर धीरे-धीरे लौटना चाहिए। शुरुआत में खिचड़ी, दलिया, उबली सब्जियां, फल और सूप जैसे हल्के भोजन का सेवन करना बेहतर होता है, पानी का भरपूर सेवन करें। इसके बाद धीरे-धीरे सामान्य आहार शामिल करें। अचानक बहुत अधिक खाना से लीवर और आंतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।