बलिया। विश्व गर्भनिरोधक दिवस पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी कैंप कार्यालय में गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में सीएमओ डॉ. जितेंद्र पाल ने कहा कि परिवार के साथ ही समाज और देश की खुशहाली के लिए जरूरी हो गया है कि हर कोई छोटे परिवार के बड़े फायदे के बारे में गंभीरता से विचार करे। बच्चे का जन्म तभी हो जब माता-पिता उसके लिए पूरी तरह से तैयार हों ।
अपर मुख्य चिकिसा अधिकारी/परिवार नियोजन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने बताया कि पहले और दूसरे बच्चे के जन्म के बीच में कम से कम तीन साल का अंतर रखना चाहिए। इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि कोविड-19 के समय में गर्भ निरोधक गोली छाया, प्रसव के तुरंत बाद लगने वाली पीपीआईयूसीडी और कंडोम की डिमांड ज्यादा रही। इसमें फ्रंट लाइन वर्कर (आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं एएनएम) की भूमिका सराहनीय रही। कोविड के चलते अस्पतालों में नसबंदी की सेवा नहीं दी जा सकती थी तो लोगों ने अस्थायी साधनों के प्रति दिलचस्पी दिखाई।
डॉ. कुमार ने कहा कि गर्भ निरोधक साधनों की मौजूदगी के बाद भी अनचाहे गर्भधारण की स्थिति विभाग की मंशा अनुरूप ठीक नहीं है। इसको और बेहतर बनाने के लिए जन जागरूकता के माध्यम से व्यवहार बदलना जरुरी है।
इस अवसर पर अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिनंदन प्रसाद, डॉ. आनंद कुमार, डॉ. सिद्धार्थ मणि दुबे, परिवार नियोजन परिवार नियोजन कार्यक्रम के लॉजिस्टिक मैनेजर उपेंद्र चौहान आदि उपस्थित रहे।