हाइब्रिड सोलर सिस्टम की अधिक मांग
हाइब्रिड सोलर सिस्टम की मांग अधिक बढ़ गई है। यह एक ऊर्जा समाधान है, जो विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सौर पैनलों, बैटरी स्टोरेज और ग्रिड बिजली को जोड़ता है। यह दिन के दौरान सौर ऊर्जा का उपयोग करता है, रात के समय उपयोग या कटौती के लिए बैटरी में अतिरिक्त बिजली संग्रहीत करता है, और आवश्यकता पड़ने पर ग्रिड से बिजली खींचता है। इसमें प्रतिकिलो वाॅट 80 से 85 हजार खर्च आ रहा है। सरकार की तरफ से सब्सिडी भी दी जा रही है।
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सोलर सिस्टम लगाने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। इसके लिए आवेदन भी आ रहे है। सूर्य पीएम से लोगों का काफी लाभ मिल रहा है। सौर ऊर्जा से बिजली का कोई आंकड़ा अभी नहीं है। एक वर्ष होने पर बिजली विभाग आंकड़ा देता है। फिलहाल कितना बन रहा इसकी सटीक जानकारी नहीं है। -धन प्रसाद, पीओ नेडा।
रेलवे स्टेशन पर 146 किलोवाट का लग रहा सोलर प्लांट, बिजली बिल होगा आधा
रेलवे बिजली को लेकर आत्मनिर्भर बन रहा है। स्टेशन भवन पर 146 किलोवाट का रूफटॉप सोलर पैनल लगाया जा रहा है। जिससे प्रतिदिन 441 यूनिट बिजली पैदा होगी। स्टेशन पर अभी रोज 324 यूनिट बिजली की खपत है। गर्मी के मौसम में बिजली का बिल चार लाख रुपया प्रतिमाह आ रहा है। सोलर पैनल चालू होने के बाद करीब दो लाख रुपया प्रतिमाह की बचत होगी।
वाराणसी मंडल पर वित्त वर्ष 2025-26 में माह अप्रैल तक कुल 519 किलोवाट क्षमता के सोलर पावर प्लांट स्थापित किए गए हैं, जिसमें बनारस स्टेशन पर 141 किलोवाट, मऊ स्टेशन पर 71 किलोवाट, वाराणसी सिटी कोचिंग डिपो में 60 किलोवाट, बलिया स्टेशन पर 146 किलोवाट, मसरख स्टेशन पर 40 किलोवाट, गोपालगंज स्टेशन पर 35 किलोवॉट एवं थावे स्टेशन पर 26 किलोवाट क्षमता (केडब्ल्यूपी) के रूफटॉप सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं।
रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, वाराणसी अशोक कुमार ने बताया कि बलिया स्टेशन के परिचालन कक्ष, यात्री विश्रामालय, टिकट घर, कंट्रोल रूम सहित अन्य भवनों पर पैनल लगाए गए हैं। अभी करीब 100 किलोवाट के प्लांट से प्रतिदिन तीन हजार रुपये की बचत हो रही है। आने वाले दिनों रोज चार हजार से अधिक की बचत होगी। प्रति माह करीब दो लाख रुपये बिजली के बिल में कटौती होगी। आने वाले दिनों में कर्मचारी आवासों व निर्माणाधीन कार्यालयों पर भी सोलर प्लांट लगाया जाएगा।