जिले के कई विभाग उधार के अधिकारियों के सहारे चल रहे हैं। विभागीय अधिकारियों के प्रोन्नत के बाद स्थानांतरण व सेवानिवृत्त होने के कारण कई पद रिक्त हुए लेकिन अभी तैनाती नहीं हुई है। अधिकारियों के नहीं मिलने के कारण फरियादियों को भी परेशान होना पड़ता है।
जिले में अधिकांश विभाग जहां कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं वहीं कई विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों की कमी है। पंचायती राज विभाग की भूमिका गांवों के विकास में अहम होता है। पिछले कई वर्षों से गैर वित्तीय अधिकार वाले जिला पंचायत राज अधिकारी ही तैनात हो रहे हैं। जिला समाज कल्याण विभाग में कर्मियों की कमी के चलते हॉस्टल प्रभारी को संबद्ध कर बीते कई वर्षों से उनसे पटल का कार्य लिया जा रहा है। वहीं जिला समाज कल्याण अधिकारी विनोद कुमार सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद किसी की तैनाती नहीं हुई है। युवा कल्याण विभाग में विकास विभाग के कर्मचारी को संबद्ध किया गया है। यह तो महज उदाहरण भर है, अधिकांश विभाग कर्मियों की कमी का दंश झेल रहे हैं। जिला विकास अधिकारी राजित राम मिश्र का प्रमोशन के बाद स्थानांतरण हो चुका है और इसका प्रभार डीआरडीए के परियोजना निदेशक उमेश मणि त्रिपाठी को दिया गया है। उपायुक्त मनरेगा का प्रभार उपायुक्त एनआरएलएम के पास करीब एक वर्ष से है। जिला युवा कल्याण अधिकारी का प्रभार देवरिया के अधिकारी नितीश राय के जिम्मे तो जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का प्रभार देवरिया के अधिकारी आशुतोष पांडेय के पास है।
अधिकारियों की तैनाती व कर्मियों से संबंधित मामला शासन स्तर का है। समय-समय सूचनाएं शासन को भेजी जाती हैं।
- उमेश मणि त्रिपाठी, पीडी डीआरडीए व प्रभारी डीडीओ, बलिया