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एसआईआर: बलिया में -13 हजार से अधिक नो मैपिंग मतदाताओं की सुनवाई, वोटर नहीं दे रहे साक्ष्य; आयोग ने कही ये बात

Fri, 13 Feb 2026 06:34 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, बलिया।

सार

Ballia News: बलिया में अब उक्त मतदाता दूसरी नोटिस पर पहुंच रहे हैं तो भी वे साक्ष्य नहीं उपलब्ध करा रहे हैं। शेष 13 हजार 288 लोग नोटिस के बावजूद उनके पास उपस्थित नहीं हुए थे।
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एसआईआर के काम में लगे बीएलओ। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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UP News: विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण एसआईआर में दोबारा नोटिस भेजे गए 13 हजार 288 को नो मैपिंग मतदाताओं की सुनवाई शुरू हो गई है। अधिकतर मतदाता चुनाव आयोग के गाइड लाइन के मुताबिक साक्ष्य नहीं दे रहे हैं। ऐसे में उन्हें तीसरी बार नोटिस भेजा जाएगा।

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17 हजार 399 मैपिंग करने के लिए नियुक्त 15 एईआरओ की ओर से नोटिस जारी करने के बावजूद पहले नोटिस पर मात्र 4 हजार 111 लोग सुनवाई और मैपिंग करने के लिए एईआरओ के पास पहुंचे थे। लेकिन इन मतदाताओं में से अधिकांश मतदाताओं ने उचित साक्ष्य नहीं दे सके। 

दूसरी नोटिस पर 1465 लोग उपस्थित हुए है। लेकिन उनके पास भी पर्याप्त साक्ष्य नहीं है। इसकी जानकारी देते हुए उपजिलाधिकारी आलोक प्रताप सिंह ने बताया कि जो लोग इस सुनवाई में नोटिस मिलने के बावजूद उपस्थित नहीं हो रहे हैं, उन्हें दोबारा नोटिस जारी की जा रही है।

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उन्हें पहली बार में सुनवाई के लिए अलग-अलग तिथियों को उपस्थित होकर अपना पक्ष व प्रमाण पत्र रखने को निर्देशित किया गया है। वहीं सुनवाई के दौरान उपस्थित 4111 लोगों में से अधिकांश लोगों ने अधूरे साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं। उन्हें भी नोटिस देकर संपूर्ण साक्ष्य के साथ दोबारा उपस्थित होने को कहा गया है।

बैरिया विधानसभा में कुल तीन लाख 53 हजार 356 मतदाताओं का एसआईआर के क्रम में मैपिंग करना था। जिसमें तीन लाख 35 हजार 997 मतदाताओं की ही मैपिंग हो पाई है। शेष 17 हजार 399 मतदाताओं की मैपिंग नहीं हो पाई थी। उन्हें नोटिस जारी किया गया था। इसके लिए 15 एईआरओ लगाए गए हैं। अब तक 40111 मतदाता ही नोटिस मिलने पर सुनवाई के लिए उपस्थित हो सके हैं। शेष 13 हजार 288 मतदाता नोटिस मिलने के बावजूद सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हुए हैं।
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बहुओं के प्रमाणपत्र नहीं मिल रहे
मतदाताओं का कहना है कि बिहार या दूसरे प्रांत से आई बहुओं का वैध प्रमाण पत्र नहीं मिलने के कारण परेशानी हो रही है। क्योंकि अधिकांश जगहों पर लोग लड़कियों का नाम मतदाता सूची में नहीं शामिल कराते थे। ऐसे में यह एक गंभीर समस्या बन गई है। निर्वाचन आयोग को इसका समाधान निकालना होगा।
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