बलिया। गर्मी बढ़ने के साथ कुत्ते, सियार, बिल्ली और बंदर खूंखार हो गए हैं। इनके काटने से जख्मी मरीजों की संख्या दो माह के अपेक्षा करीब दो गुना बढ़ गई है। जनवरी से अबतक 6451 लोगों को कुत्ताें और 580 को बंदरों ने काटकर घायल कर दिया।
मार्च-अप्रैल में जहां औसतन 40 से 50 लोग एआरवी का इंजेक्शन लगवाने आते थे, अब 105 से भी अधिक हो गई है। कई दिन तो 110 से अधिक मरीज आए। हालांकि अधिकतर सीएचसी पर एआरवी उपलब्ध है। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में कुत्ता सड़कों पर और बंदर घरों के अंदर काट कर घायल कर रहे हैं। कुत्तों का प्रजनन माह होने के कारण यह और खतरनाक हो गए हैं। कई मोहल्ले में इनका आतंक पसरा हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जनवरी से अब तक 6451 लोगों को कुत्तों ने काटा है, वहीं 580 लोगों को बंदरों व 48 लोगों को सियार व बिल्ली ने काटा है। चारों के काटने से रेबीज बीमारी होने का भय बना रहता है। रेबीज एक घातक वायरल संक्रमण है। लक्षणों के आधार पर इस बीमारी को हाइड्रोफोविया के नाम से भी जाना जाता है। रेबीज का संक्रमण कुत्ता, बंदर, लंगूर, सियार, लोमड़ी आदि जानवरों के काटने से होता है।
चिकित्सकों की माने तो इस बीमारी की चपेट में आकर दुनिया भर में सालाना 50 हजार से ज्यादा लोगों की असमय मौत होती है। इनमें सबसे अधिक मौतें भारत में होती हैं। इसमें लापरवाही जानलेवा साबित होती है। सरकार द्वारा इस बीमारी जागरूकता को लेकर अभियान चलाया जाता है।
सीएमओ डॉक्टर संजीव वर्मन ने बताया कि रेबीज एक खतरनाक बीमारी है। लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। जिले के अस्पतालों में अभी करीब 4336 आरवी की डोज है। जिला अस्पताल में रोज 100 सौ से अधिक लोगों को रेबीज का इंजेक्शन लगता है। इसमें बिहार के लोग भी रेबीज का इंजेक्शन लगाने आते हैं।