बलिया। स्वयं सहायता समूह से महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। अपने परिवार के भरण-पोषण से लेकर बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्च उठा रही हैं। ऐसे ही एक समूह का गठन कर दस महिलाओं ने अपने जीवन में बदलाव लाया है।
शहर के हरपुर मोहल्ला निवासी सरिता श्रीवास्तव ने 2019 में स्वयं सहायता समूह का गठन किया। घर पर बिंदी व सिलाई- कढ़ाई का काम करती थीं। कोरोना काल के दौरान मास्क बनाकर सस्ते दाम पर लोगों को उपलब्ध कराया। आजादी के 75 वर्ष पर 15 अगस्त को तिरंगे सिलकर आय बढ़ाई। इसके बाद उन्होंने दस महिलाओं को रोजगार दिया और घर पर सालाना 70 से 80 हजार की कमाई होने लगी। तिरंगे सिलने के लिए सरकारी ऑर्डर मिला था। उसके बाद 10 समूह को मिलाकर एलए बना। डूडा ने समूह के बेहतरीन काम को देखते हुए जिला अस्पताल में खुलने वाले शक्ति कैंटीन के संचालन करने की जिम्मेदारी इस समूह को सौंप दी।
डूडा ने समूह को जिला अस्पताल (कालरा वार्ड) में जगह उपलब्ध कराई और सरकारी मदद से इन्हें कैंटीन संचालित करने के लिए जरूरी सामान भी मुहैया कराए। मार्च में शुरू हुई इस कैंटीन में कम दाम पर खाना उपलब्ध कराया गया। यहां 70 रुपये में लोगों को भरपेट भोजन मिल रहा है।
गुणवत्ता अच्छी होने के चलते कैंटीन में चिकित्सकों व स्थास्थ्य कर्मियों के अलावा बैंककर्मी, कर्मचारी भी खाना खाने के लिए पहुंचते हैं। कैंटीन में चाय, कॉफी, पोहा, समोसा के अलावा खाने की अन्य सामग्री उपलब्ध है। जंक फूड व मांसाहारी भोजन यहां नहीं मिलता है। मरीजों को ऑर्डर पर खिचड़ी व दाल का पानी मिलता है। शक्ति रसोई को समूह की संगम पांडेय, अर्चना श्रीवास्तव, संजू आदि चलाती हैं।