बलिया के पत्रकार रतन सिंह की मौत के बाद लोगों का आक्रोश भड़का हुआ है, तो सियासतदार भी एक-दूूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। इन सबके बीच एक अवाज है जिसे सभी को सुुनना चाहिए और उसका दर्द भी समझना चाहिए। वो आवाज और असहनीय दर्द है पत्रकार रतन सिंह की पत्नी प्रियंका सिंह का। प्रियंका ने बुधवार को "अमर उजाला" से खास बातचीत में पुलिस की हकीकत बयां करते हुए सनसनीखेज खुलासा करते कई गंभीर सवाल उठाए।
प्रियंका सिंह का कहना है कि तत्कालीन थानाध्यक्ष फेफना शशि मौली पांडेय इस हत्याकांड में उतने ही दोषी हैं, जितने की रतन सिंह को गोली मारने वाले बदमाश। जब उनके पति रतन सिंह को लाठी-डंडों से पीटा जा रहा था तो शशि मौली मौके पर पहुंचने के बावजूद वहां से भाग गए थे। यदि उन्होंने बदमाशों को ललकारा होता तो उनकी हिम्मत रतन सिंह को गोली मारने की नहीं होती और मेरा रतन आज जिंदा होता। प्रियंका कहती हैं उन्हें शशि मौली से ही नहीं पुलिस की वर्दी से नफरत हो गई है।
पत्रकार रतन सिंह। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला।
प्रधान के आदमी ने बुलाया था घर
उनके पति को प्रधान का आदमी घर से बुलाकर ले गया था। कहा गया था कि विवाद के मामले में समझौता कराना है। लेकिन वहां पहुंचते ही रतन को एक दर्जन लोगों ने घेरकर पीटना शुरू कर दिया। परिवार वालों को जब इसकी भनक लगी तो तत्काल इसकी सूचना फेफना थाने को दी गई। इसके बाद इंस्पेक्टर शशि मौली की गाड़ी घटनास्थल की तरफ जाती दिखी, लेकिन फिर अचानक गाड़ी वापस लौट गई।
तब परिवार वालों ने 112 नंबर पर पुलिस को जानकारी दी। इसके बाद घटनास्थल से 100 मीटर की दूरी पर स्थित फेफना थाने की पुलिस से भी पहले सात किलोमीटर दूर गड़वार थाने की पुलिस पहुंच गई। प्रियंका कहती हैं शशि मौली ने अपराधियों के साथ मिलकर उनके पति की हत्या कराई है। जब तक सरकार शशि मौली को बर्खास्त नहीं करती और उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं होता वह चुप नहीं बैठेंगी।
पत्रकार रतन सिंह के पिता विनोद सिंह।
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प्रियंका कहती हैं कि पुलिस इंस्पेक्टर शशिमौली ने भागने की बजाय घटनास्थल पर जाकर हत्यारों को ललकारा होता तो मेरे पति की जान बच गयी होती। इंस्पेक्टर पर निलंबन की कार्रवाई पर प्रियंका ने कहा कि मेरी संतुष्टि तब होगी जब इस इंस्पेक्टर को सेवा से बर्खास्त किया जाएगा। उसके खिलाफ भी हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
प्रियंका के आरोप को लेकर जब फेफना थाने के निवर्तमान इंस्पेक्टर शशिमौलि पाण्डेय से बात की गई तो उन्होंने इसे सरासर गलत बताया कि वे घटनास्थल से भागे थे। उन्होंने बताया कि वे फ़ोर्स के साथ गए थे और जाते ही धरपकड़ में लग गए थे।