सागरपाली। दरामपुर के टोंस नदी में डूबे दो पशु व्यापारियों की खोज में थाना पुलिस की ओर से बरगलाने से आक्रोशित स्वजनों ने एसडीएम और तहसीलदार सदानंद सरोज का सोमवार को घेराव कर लिया। नाव घटना में बचे चरवाहों को गलत बयान देने के लिए पुलिस की ओर से दबाव बनाने से परिजन नाराज थे। पुलिस प्रशासन की ओर से दोनों पशु व्यापारियों की खोज के लिए एनडीआरएफ की टीम बुलाने पर लोग शांत हुए।
दरामपुर गांव निवासी दिलीप पासवान उर्फ उत्तिल, अशोक यादव व धरिक्षन तीनों लोग पशु व्यापारी रघुनाथ यादव (50) बांसडीह, माया शंकर यादव (50) निवासी घसौती गड़वार को गाय का बछड़ा दिखाने के लिए नदी के पार ले जा रहे थे। सभी छह लोग छोटी नाव (डोंगी) पर सवार होकर नदी के पार जा रहे थे। बीच नदी में तेज लहर में डेंगी डूब गई। सभी बच गए लेकिन दोनों पशु व्यापारियों का पता नहीं लग पाया था। स्थानीय पुलिस ने मामले में लीपापोती करते हुए बयान दिया था कि सभी लोग बच गए हैं। बचे चरवाहों पर भी ऐसा बयान देने के लिए दबाव बनाया था। इससे परिजन और ग्रामीण नाराज थे। घेराव की खबर लगते ही पूरा क्षेत्र पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। मौके पर एएसपी दुर्गाशंकर तिवारी, सीओ सिटी प्रीति त्रिपाठी पहुंचीं। तहसीलदार ने इसकी खबर उच्चाधिकारियों को दी। प्रशासन ने तत्काल शव खोजबीन के लिए एनडीआरएफ टीम को बुलावा भेजा। पत्र दिखाने के बाद स्वजन शांत हुए। एनडीआरएफ टीम मंगलवार को वाराणसी से बलिया पहुंचेगी। नाव घटना में बचे चार चरवाहों ने पुलिस पर गलत बयान देने के लिए फर्जी मुकदमा में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगाया।