सिकंदरपुर। सरयू नदी एक बार फिर रौद्र रूप लेने लगी है। लगातार बढ़ते जलस्तर ने नदी किनारे बसे गांवों में बेचैनी बढ़ा दी है। एक ओर जहां बाढ़ की आशंका से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है, वहीं पशुओं के चारे की समस्या और विषैले जीव-जंतुओं के खतरे ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। एक रात में 51 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई है।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि नदी का जलस्तर जैसे-जैसे बढ़ रहा है, खेतों और चारागाहों में पानी भरने लगा है। इससे मवेशियों के लिए चारा जुटाना मुश्किल होता जा रहा है। इसके साथ ही जलस्तर बढ़ने के साथ ही सांप, बिच्छू और अन्य विषैले जीव-जंतु सुरक्षित स्थान की तलाश में गांवों की ओर रुख करने लगे हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर लोग खासे चिंतित हैं। बाढ़ खंड से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार सात जुलाई की शाम चार बजे सरयू नदी का जलस्तर 61.85 मी. था, जो आठ जुलाई की सुबह आठ बजे तक बढ़कर 62.36 मीटर तक पहुंच गया। एक रात में 51 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई है। इस बढ़ोतरी ने गांवों में बाढ़ की आशंका को बल दे दिया है।
बढ़ते खतरे को भांपते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन से तटबंधों की निगरानी बढ़ाने और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए राहत व बचाव के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बाढ़ से पहले जलस्तर में इस तरह की वृद्धि नहीं होती थी लेकिन इस बार लगातार वृद्धि हो रही है, जो बाद में गंभीर रूप ले लेती है। उपजिलाधिकारी सुनील कुमार लगातार नदी किनारे के गांव में भ्रमण कर लोगों को जागरूक करने में लगे हुए हैं। बाढ़ चौकियों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।