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संत सम्मेलन में बही ज्ञान गंगा

Tue, 28 Apr 2015 11:28 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
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महर्षि विश्वामित्र की तपोभूमि बक्सर से सटे अहिरौली में आयोजित लक्ष्मी नारायण विराट महायज्ञ सह अखिल अंतरराष्ट्रीय वैष्णव संत महासम्मेलन सोमवार को हुआ। इसमें देश के सैकड़ों साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने भक्ति और आध्यात्म के महाकुंभ में डुबकी लगाई।
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त्रिदंडी स्वामी महाराज के शिष्य जीयर स्वामी जी महाराज चरित्रवन बक्सर की देखरेख में लक्ष्मी नारायण यज्ञ 19 अप्रैल को कलश स्थापना के साथ शुरू हुआ। इसकी पूर्णाहुति मंगलवार को हुई।

यज्ञ मंडप में 1151 यज्ञ कुंड बनाए गए थे। यहां आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सोमवार को भीड़ के चलते  जाम की स्थिति रही। यज्ञ स्थल पर एक तरफ ज्ञान की गंगा बह रही थी तो दूसरी तरफ भक्ति की यमुना।
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उत्तर और दक्षिण भारत से आए साधु-संतों ने प्रवचन किया। यज्ञशाला की परिक्रमा करने के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। प्रवचनकर्ताओं ने कहा कि सनातन धर्म में पूरे विश्व को एक परिवार माना गया है तथा सभी के सुखी होने की कामना की गई है।

महासम्मेलन को संबोधित करने वालों में राजस्थान अलवर के मधुसुदन दास जी, हरियाणा के द्रोण पीठाधीश्वर, जगत गुरु धरड़ी धराचार्य, ऋषिकेश के स्वामी कृष्णाचार्य जी, गोविंद जी, चिन्मय स्वामी, वीरू पुन:गुरी जिअर स्वामी, व्रतधर रामानुजाचार्य जीअर स्वामी, यतिराज रामानुज जिअर स्वामी, संपत कुमार जिअर स्वामी, जगन्नाथ पुरी उड़ीसा से

अनंत विभूषित इंदिरा रमण जी महाराज, राजस्थान पुष्कर के पीठाधीश्वर रामचंद्राचार्य जी महाराज, वृंदावन के कृष्णचंद्र ठाकुर आचार्य, नरेश नारायणाचार्य जी, अयोध्या के राघवाचार्य जी, देवरिया यूपी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु राज नारायणाचार्य जी महाराज, कथा भाष्कर रत्नेश जी महाराज, मानस मार्कंड, मारुति किमकर जी महाराज, ज्योतिषाचार्य गिरधर जी स्वामी, लक्ष्मीनारायण मंदिर के पीठाधीश्वर राज गोपालाचार्य जी महाराज समेत उत्तर और दक्षिण भारत के कई अन्य साधु-संत शामिल रहे। आयोजन के चलते इलाके का माहौल भक्तिमय हो गया था।
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