बलिया। बीती दीपावली पर मिठाई व अन्य 36 खाद्य पदार्थाेंं की सैंपलिंग जांच में 14 की रिपोर्ट खराब आई। इसमें खाद्य को चटकदार बनाने के लिए ज्यादा रंग का प्रयोग हुआ था। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की अनदेखी से जिले के कई स्थानों पर मिलावटी खोवा बनाया जा रहा। वाराणसी, कानपुर, लखनऊ व बिहार से खोआ की खेप बाजार में खप रही है।
होली पर बाजार में बिक रहे खाद्य पदार्थों में मिलावट का खेल तेज हो गया है। चटख और रंग बिरंगी रंगों मिठाइयों, खोआ, नमकीन और पेय पदार्थों में कृत्रिम रंग मिलाए जा रहे हैं, जो सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। होली त्याेहार नजदीक आते ही बाजार में रंग-बिरंगी मिठाइयों और खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। इसी मांग का फायदा उठाकर धंधेबाज मुनाफे के लालच में प्रतिबंधित और गैर मानक के रंगों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इसके अलावा आइसक्रीम, शीतल पेय पदार्थ और मसालों तक में नुकसानदायक रंग मिलाए जा रहे हैं। ये रंग दो प्रकार के होते हैं। कोलतार (खाने योग्य) और प्राकृतिक (पेंट)। केवल कोलतार रंगों को ही खाने की वस्तुओं में मिलाने की अनुमति है। इसमें लाल, पीला, हरा और नीला रंग महत्वपूर्ण है। ये रंग दो प्रकार के होते हैं अम्लीय और क्षारीय। शेष सभी अम्लीय और क्षारीय रंगों के इस्तेमाल पर रोक है। हालांकि, अब कोलतार रंगों में भी रसायन मिलाए जा रहे हैं।
उदाहरणार्थ पीसी हुई लाल मिर्च में घुलनशील कोलतार रंग जैसे सूडान 293 की मिलावट की जाती है, ताकि कूड़ा, कंकड़, बुरादा आदि को छिपाया जा सके। बिहार, आजमगढ़, कानपुर से मिलावटी खोवा घड़ल्ले से आ रहा है। फुटकर में 280 से 300 रुपये तक में यह खोवा मिल जाता है।
वहीं, बाहर से आने वाले खोवा सौ रुपया तक सस्ता है।