गलन के साथ ठंड बढ़ने से दिनों-दिन जिला अस्पताल सहित नगर के अस्पतालों में कोल्ड डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। नगर के सरकारी अस्पताल में जहां प्रतिदिन 10-20 कोल्ड डायरिया के मरीज आ रहे हैं, वहीं अलग-अलग निजी अस्पतालों में दर्जनों बच्चे भर्ती कराए गए हैं।
नगर सहित ग्रामीण इलाकों में ठंड का कहर जारी है। आलम यह है कि प्रतिदिन 10 से 20 मरीज कोल्ड डायरिया से पीडि़त होकर जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। जबकि निजी अस्पतालों में दर्जनों बच्चे और वयस्क कोल्ड डायरिया की जद में आने से भर्ती हैं।
ठंड की वजह से मासूम और नवजातों को उल्टी-दस्त शुरू हो जा रहा है। छह से आठ माह के बच्चों के लिए ठंड काफी खतरनाक है। जिला अस्पताल में आए मरीजों में अधिकांश बच्चे एक दिन से लेकर एक साल तक के है।
जबकि निजी अस्पताल में भी प्रतिदिन 10-12 बच्चे उपचार के लिए आ रहे हैं। चिकित्सकों की माने तो बच्चों को ठंड लगने के बाद उन्हें तत्काल उपचार के लिए किसी अनुभवी बाल रोग रोग विशेषज्ञ को दिखाएं।
जिला अस्पताल में भर्ती प्रोफेसर कालोनी निवासी आदर्श (11 माह), कोतवाली क्षेत्र के हरपुर चंद्रभान निवासी आयुष (10 माह), बिहार के बक्सर जिले के ब्रह्मपुर थाना क्षेत्र के जवहीं निवासी मनीष यादव (05 माह), नगर के बनकटा निवासी श्याम (10 माह), श्याम (10) के परिजनों ने बताया कि ठंड के चलते कई बार तबियत खराब हो चुकी है।
यह दो दिनों से जिला अस्पताल में भर्ती हैं, वहीं निजी चिकित्सालयों में भी कोल्ड डायरिया के मरीज करीब दो दर्जन से अधिक हैं। मनियर के सारंगपुर निवासी गुड्डू यादव का एक दिन का बेटा भी कोल्ड डायरिया से पीडि़त है।
ठंड के दिनों में बच्चों को गुनगुना लिक्विड देते रहें। बच्चों को ठंड से बचाने के लिए ऊनी कपड़े का प्रयोग करें। गीले कपड़े किसी भी हालत में अधिक देर तक बच्चों के शरीर पर न रहने दें। अधिक तबियत खराब होने पर बाल रोग चिकित्सक से सलाह लेकर उपचार कराएं।