प्रदेश सरकार के विरोध में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की दो दिवसीय पेन डाउन हड़ताल मंगलवार को प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर आरंभ हुई।
इस दौरान विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने कलेक्ट्रेट में पहुंचकर प्रदेश सरकार के खिलाफ अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार तरीके से आवाज बुलंद करते हुए धरना दिया।
कर्मचारियों ने मांग की कि राज्य कर्मचारियों को भी केंद्र कर्मचारियों की भांति समस्त भत्ते दिए जाएं। दो दिवसीय हड़ताल में बुधवार को सभी कर्मचारी संगठन एकजुट हो हिस्सा लेंगे।
धरने को संबोधित करते हुए राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की जिलाध्यक्ष सत्या सिंह ने कहा कि कर्मचारियों को दी जाने वाली सुविधाएं दिन ब दिन कम की जा रही है।
उसे तत्काल बंद किया जाए। कर्मचारियों का जायज मांगों को गंभीरता से नहीं लेना सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों को दर्शाता है।
सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों का विरोध करते हुए कहा कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें कर्मचारियों के साथ धोखा है। इसमें कर्मचारियों के पक्ष को नजरअंदाज किया गया है।
कहा कि सरकार द्वारा सातवें वेतन आयोग में 23.55 प्रतिशत वृद्धि का प्रचार मात्र छलावा है। जबकि कर्मचारियों को 3.48 से 6.64 प्रतिशत की मात्र वृद्धि की गई है।
वहीं अधिकारियो को 21.7 प्रतिशत बढ़ाया गया है। चेताया कि यदि सरकार कर्मचारियों की जायज मांगों को गंभीरता से नहीं लिया तो 23 फरवरी 2016 से अनिश्चित कालीन हड़ताल के लिए बाध्य होंगे।
इस मौके पर बृजेश कुमार सिंह, कर्मचारी नेता बलवंत कुमार सिंह, रमाशंकर यादव, शैलेंद्र सिंह, रामपूजन पटेल, अरूण कुमार सिंह, सुरेंद्र यादव, धीरज राय, जितेंद्र सिंह, वाईजी मिश्रा, रमाशंकर शर्मा, लालबाबू यादव, संजीव चौबे, शंभू नाथ सिंह, वेद प्रकाश पांडेय आदि मौजूद रहे।
पुरानी पेंशन प्रणाली को बहाल किया जाय, - सात, 14 और 20 वर्षों की सेवा पर तीन पदोन्नति पद का ग्रेड वेतन दिया जाय - कर्मचारियों के इलाज की व्यवस्था में भ्रष्टाचार बंदकर कैशलेस सुविधा प्रदान किया जाय - प्रेरक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता,
ग्राम रोजगार सेवक सहित संविदा कर्मियों को स्थायी करने के साथ-साथ राजकीय कर्मी घोषित किया जाय - फील्ड के कर्मचारियों को बाइक भत्ता प्रदान किया जाय - निगमों के घाटे के लिए उच्चाधिकारी व सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं- कर्मचारियों का वेतन काटा जा रहा है, इसे तत्काल बंद किया जाय - केंद्रीय कर्मचारियों की भांति राज्य कर्मचारियों को मकान किराया भत्ता दिया जाए ।