सामान लेकर छपरा जाता ओवरलोड ट्रक। अमर उजाला
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ओवरलोडिंग पर अंकुश लगाने को लेकर प्रदेश सरकार के सख्त निर्देशों के बावजूद प्रशासन की नाक के नीचे ओवरलोड मालवाहक धड़ल्ले से सड़कों पर दौड़ रहे हैं। खनिज सम्पदा को लेकर नौ घनमीटर माल की रॉयल्टी जमा कर 18 से 20 घन मीटर मोरम लाद कर निकल रहे ट्रकों द्वारा सरकार को लाखों के राजस्व का चूना लगाया जा रहा है। कार्रवाई को लेकर आरटीओ विभाग के अफसर और कर्मचारियों की भूमिका सवालों के घेरे में हैं। विभाग की मानें तो एक माह में 419 वाहनों का चालान किया गया है।
सरकार के तमाम निर्देश के बावजूद जनपद में ओवरलोडिंग वाहनों के परिचालन पर रोक नहीं लग पाई है। लोगों की मानें तो रात दिन ओवरलोड वाहनों के संचालन से सड़कें क्षतिग्रस्त हो जाती है। जिस वजह से आये दिन दुर्घटनायें भी होती हैं। यह ओवरलोडेड मालवाहक राष्ट्रीय और राज्य मार्गों से तो गुजरते ही हैं। वहीं शहर की अनाज और सब्जी मंडियों में भी इनकी आवाजाही है। इससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस ओर न तो परिवहन विभाग और न ही पुलिस प्रशासन के अधिकारी गंभीर दिखाई दे रहे हैं। ओवरलोडिंग के द्वारा सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का चूना लगाया जा रहा है। ट्रकों में बीस से पच्चीस टन माल लदा होता है। वहीं, दूसरी ओर एआरटीओ विभाग का दावा है कि ओवरलोडिंग पर काफी हद तक अंकुश लग चुका है। ओवरलोडिंग गाड़ियों के खिलाफ लगातार अभियान चल रहा है और चालान भी काटा जा रहा है।