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किसी हाल में 15 नवंबर तक नहीं बन सकती सड़कें गड्ढामुक्त

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जिले में ऐसी भी हैं सड़कें: नगरा नहर बाईपास की जर्जर सड़क। - फोटो : BALLIA
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बलिया। जिले में मुख्य मंत्री का प्रदेश की सड़कों को गड्ढामुक्त करने का दावा किसी भी सूरत में पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। 15 नवंबर तक सड़कों को गड्ढामुक्त करने का दावा किसी भी सूरत में पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। जिले में आलम ये है कि कुछ चुनिंदा सड़कों को छोड़ दिया जाए तो मुख्य मार्ग से लेकर संपर्क मार्ग, यहां तक कि नेशनल हाईवे में भी ऐसे-ऐसे गड्ढे हैं जो न सिर्फ दुर्घटना का सबब बन सकते हैं, बल्कि सरकारी प्रयास और अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान लगाते हैं।
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जिले में हल्दी विकास खंड के बेलहरी अंतर्गत पिंडारी गांव में जाने वाले मुख्य मार्ग को 2001 में तत्कालीन विधायक भरत सिंह ने बनवाया था। आज उसकी हालत खराब है। रसड़ा क्षेत्र के गांवों को जोड़ने वाले अधिकांश संपर्क मार्ग जर्जर हैं। बलिया-लखनऊ मार्ग पर भी माधोपुर से चिंतामणि पुर तक जाने वाली सड़क की हालत बुरी है। अमहर पट्टी दक्षिण से जाम को जाने वाली सड़क एवं ग्रामसभा माधोपुर के बन टोला हरिजन बस्ती में स्थित प्राइमरी स्कूल तक जाने वाली सड़क अत्यंत ही जर्जर है।
मनियर बांसडीह व मनियर सिकंदरपुर के मुख्य मार्ग पर जगह-जगह गड्ढा हो गया है। बेल्थरारोड क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाले लगभग सभी मार्ग जर्जर हैं। सीयर-पशुहारी मार्ग, कुंडैल-बहोरवा मार्ग, डीएसपी हेड मार्ग, फरसाटार-तेलमा- शाहपुर मार्ग समेत अनेक मार्ग जर्जरावस्था में दुर्घटना को दावत दे रहे हैं। सहतवार क्षेत्र के बिसौली मार्ग से बरियारपुर बेउर जाले वाली संपर्क मार्ग लगभग चार साल पहले बनी थी। स्थिति बहुत ही दयनीय है। बैरिया क्षेत्र अंतर्गत सुरेमनपुर-नारायणगढ़, भिखाछपरा-रानीगंज बाजार आदि दर्जनों सड़के जर्जर व गड्ढायुक्त हो गयी है।
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मंत्री के क्षेत्र की सड़कें भी जर्जर : बलिया। जनपद में सड़कों की हालत का अंदाजा इससे ही लगा सकते हैं कि प्रदेश के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार उपेंद्र तिवारी के क्षेत्र की सड़कें भी जर्जर हैं। फेफना विधानसभा क्षेत्र में कपिलेश्वरी भवानी मंदिर से गंगहरा तक लगभग डेढ़ किमी मार्ग इतना जर्जर है कि वाहन तो दूर पैदल चलना भी खतरे से खाली नहीं है। जबकि यह लगभग आधा दर्जन गांवों का संपर्क मार्ग है। इसी मार्ग को लेकर उपेंद्र तिवारी जब विधायक थे तो कहते थे कि प्रदेश में सरकार होती तो इसे ठीक करा देता। अब सरकार तो दूर वे मंत्री हैं, लेकिन सड़क जैसे पहले थी आज भी वैसी ही है। इसी क्षेत्र के चेरूइया से मोहान के मठिया तक लगभग दो किमी का मार्ग अत्यंत जर्जर है।
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