बलिया। गंगा व सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर से बंधों को खतरा उत्पन्न होने लगा है। संभावित बाढ़ के खतरे को भांपते हुए प्रशासन ने तैयारी तेज कर दी है। बाढ़ के समय बंधों के टूटने या रिसाव की निगरानी के लिए बाढ़ विभाग की तरफ से कर्मचारियों की तैनाती की गई है। कर्मचारियों की टीम बंधों की 24 घंटे निगरानी करेगी। निगरानी के लिए 12 अवर अभियंताओं की तैनाती की गई है।
जिले में गंगा व सरयू नदी से बचाव के लिए दो मुख्य बंधों के अलावा कई छोटे-छोटे बंधे बनाए गए है। सरयू नदी से बचाव के टीएस बंधा व गंगा से बचाव के लिए एनएच-31 मुख्य हैं। बाढ़ के समय नदियों की धारा इन्हीं मुख्य बंधों से आकर टकराती है। बंधों के बचाव के लिए इस वर्ष 14 परियोजनाओं पर कार्य हुआ है, जिसमें 98 करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च की गई है। बंधों की निगरानी के लिए 12 अवर अभियंताओं के नेतृत्व में टीम कर्मचारियों की टीम लगाई है। इन सभी पर निगरानी के लिए चार सहायक अभियंताओं को भी लगाया गया है। इन सभी के कार्यक्षेत्र का भी निर्धारण किया गया है।
इन बंधों पर टीम करेगी निगरानी
टीएसबंधा, हाहानाला, तेलमा धरहरा बंधा, रामपुर बिहरा बांध, कोटवा सुल्तानपुर रिंग बंधा, जमींदारी बांध में मझवलिया सोनबरसा बंध, हल्दीरामपुर रिंग बांध। टीएस बंध, डूहा कथौड़ा विस्तार बंध, पीडी बांध। जमींदारी बांध में डूहा कथौड़ा रिंग बांध, सिसोटार रिंग बांध। टीएस बंध के साथ जमींदारी बांध में कुड़िया रिंग बंध, मुड़ियारी देवरार रिंग बंध व बलुआ रिंग बांध शामिल है। वहीं, बलिया-बैरिया तटबंध, कदमतर-दुबहर रिंग बांध, बैरिया संसार टाला तटबंध, दूबेछपरा रिंग बंधा, सिताब दियरा रिंग बांध, बिरला बांध। इसके अलावा नारायणगढ़ तटबंध, सुरेमनपुर तटबंध, बकुल्हा संसाद तटबंध, बकुल्हा संसार तटबंध, इंद्रपुर थम्हनपुरा तटबंध, बलिया शहर सुरक्षा बांध, गोसलपुर बांध, मुस्तफाबाद बांध, राधा खालिसपुर बांध, नगरा रिंग बांध शामिल हैं।