बलिया। पूर्व के सालों की तरह इस साल भी क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद में धांधली शुरू हो चुकी है। कई केंद्रों पर गैर तहसील के दूरदराज गांवों के किसानों के गेहूं की खरीद की गई है जबकि उन किसानों के गांव के आसपास भी केंद्र निर्धारित हैं। उधर, किसानों की ओर से पंजीकरण में बिक्री के लिए दर्ज गेहूं की मात्रा में कटौती भी की जा रही है जिससे किसान परेशान हैं।पिछले सालों की तरह ही इस साल भी क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद में मनमानी व धांधली शुरु हो चुकी है जबकि किसान कागजी पेंच के चलते औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर हैं। जिले में किसानों से गेहूं खरीदने के लिए कुल 106 क्रय केंद्र निर्धारित किए गए हैं लेकिन अब तक कुल 98 क्रय केंद्र ही संचालित हो सके हैं और इन केंद्रों पर गुरुवार तक कुल 965 किसानों से 57681 कुंतल गेहूं की खरीद की गई है। लेकिन कई केंद्रों पर खरीद में मनमानी की गई है। आलम यह है कि कई केंद्रों पर किसानों के नाम पता ही दर्ज नहीं है फिर भी खरीद की गई है। बतौर उदाहरण नगरा क्षेत्र के खारी में स्थित सहकारी संघ के क्रय के खरीद की रिपोर्ट को देेखें तो 21 अप्रैल को पांच किसानों से कुल 299 कुंतल धान की खरीद की गई है जिसमें दो किसानों के नाम पता ही दर्ज नहीं हैं। इसके अलावा विपणन शाखा के हनुमानगंज स्थित क्रय केंद्र पर बांसडीह तहसील के बड़सरी गांव निवासी एक किसान से 18 अप्रैल को 35 कुंतल, रिगवन गांव निवासी एक किसान से 27 अप्रैल को 198 कुंतल गेहूं तो इसी तहसील के खड़ैला गांव के किसान से 28 अप्रैल को 79 कुंतल गेहूं खरीद की गई है। हैरानी की बात है कि इन गांवों के आसपास भी क्रय केंद्र स्थापित हैं। यह तो महज उदाहरण हैं अधिकांश क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद में धांधली शुुरु हो चुकी है।
उपज मात्रा में की जा रही कटौती, किसान बाजारों में गेहूं बेचने को मजबूर
नगरा। वैश्विक महामारी में भी रसड़ा तहसील के अधिकारी किसानों को परेशान करने से बाज नहीं आ रहे हैं। जिससे किसान अपनी उपज बेचने के लिए क्रय केंद्र से लगायत तहसील का चक्कर काट रहे हैं और परेशान होकर औने पौने मूल्य पर अपना गेहूं बिचौलियों को बेचने को विवश हैं। किसानों को तहसील से उपज का आधा गेहूं बेचने का आदेश मिल रहा है, वहीं बिचौलिए को तहसील से कोई दिक्कत नहीं हो रही है।
रसड़ा तहसील क्षेत्र के अब्दुलपुर मदारी के किसान सुख सागर सिंह अपने खतौनी के अनुसार धान और गेहूं क्रय केंद्र पर 65 से 70 कुंतल बेचते रहे हैं। इस साल तहसील से 27 कुंतल बेचने का आदेश मिला है। इसी प्रकार इसी गांव के दूधनाथ सिंह भी 40 से 45 कुंतल क्रय केंद्र पर देते थे इनको भी तहसील से 28 कुंतल गेहूं बिक्री का आदेश मिला है। किसानों का आरोप है कि तहसील दलालों की चांदी है और पूरी उपज की बिक्री के आदेश के लिए सौदा करते हैं। लॉकडाउन में किसानों को पुलिस के डंडे का भी भय सता रहा है। यदि तहसील के अफसर खतौनी के आधार पर या लेखपाल की आख्या पर आदेश निर्गत करते तो किसानों को परेशानी नहीं होती। परेशान किसान विवश होकर अपना गेहूं बिचौलिए को 1500 रुपये प्रति कुंतल बेच रहे हैं।