निराश्रित गोवंशियों के लिए भले ही समुचित व्यवस्था करने का दावा शासन व प्रशासन कर रहा है, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही है। जिम्मेदारों की लापरवाही से मवेशी सड़कों पर घूम रहे हैं। पशुओं के आपस में लड़ने तथा भीड़ भरे इलाके में अचानक दौड़ने से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। बावजूद, जिम्मेदार बेखबर बने हुए हैं। विभागीय लापरवाही के कारण गोवंशी भी वाहनों की चपेट में आकर काल कवलित भी हो रहे हैं।
शासन की तरफ से इन गोवंशीय के लिए कस्बा में अस्थाई गोशाला का भी निर्माण कराया गया है लेकिन उचित देखभाल के अभाव में ये गोवंशी सड़कों पर डेरा जमा लिए है। मुख्य मार्ग सहित बाजार में मवेशियों के खुलेआम घूमने से सड़क पर वाहन चलना मुश्किल हो जा रहा है। लगभग यही स्थिति ग्रामीण इलाकों की भी है।
झुंड में घूमते हुए इन पशुओं पर न तो नगर पंचायत का ध्यान है और न ही पंचायती राज विभाग ही कोई ठोस कदम उठा रहा है। हालांकि तहसील क्षेत्र की चार बड़ी गौशालाओं नहीलपार उर्फ डाकिन गंज, जिगरसंड, हड़सर (तिवारीपुर) और सिकंदरपुर कस्बा में इनको भेजा जा सकता है। निराश्रित गोवंशियों के कारण पूर्व में कई सड़क घटनाएं भी हो चुकी हैं बावजूद विभागीय सबक नहीं ले रहे हैं।
हाल ही में बलिया सिकन्दरपुर मार्ग पर खेजुरी बाजार से पहले बछड़े से टकराकर एक मोटरसाइकिल सवार गंभीर रूप से घायल हो चुका है। फिर भी इस प्रकार की लापरवाही समझ से परे है। सिकंदरपुर नगर पंचायत के ईओ मनोज कुमार पांडेय की माने तो निराश्रित पशु नगर पंचायत क्षेत्र में कहीं भी दिखने की सूचना मिलते ही नगर पंचायत के कर्मचारीयों द्वारा पकड़ कर अस्थाई गौशाला में लाया जाता है।
नगर पंचायत के कर्मचारी भ्रमण करते रहते है। जल्द ही इसकी पड़ताल की जाएगी।