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खटारा व डग्गामार वाहन से 36 किमी दूरी का 150 रुपये तक वसूल रहे किराया

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नरही। बलिया बक्सर मार्ग पर प्राइवेट वाहनों द्वारा मनमाना किराया वसूली का रिवाज काफी पुराना है। बक्सर रेलवे स्टेशन से बलिया की दूरी 36 किलोमीटर है, लेकिन किराया 120-150 रुपये लिया जाता है। इसके बावजूद जिला प्रशासन मौन धारण किए हुए हैं। कोरोना वायरस के चलते लगें लॉकडाउन में वाहनों की आवाजाही बंद थी, चालू हुआ तो सीमित सवारी ले जाना था।
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अब प्राइवेट वाहनों द्वारा ओवर लोड सवारी बैठाने के बाद भी अधिक किराया वसूला जा रहा है। प्राइवेट एंबेस्डर कार चालक बक्सर रेलवे स्टेशन से बलिया का किराया 120 रुपये प्रति सवारी, कमांडर जीप 80 रुपये सवारी ले रहे हैं। यात्रियों को चाहे दस किलोमीटर जाना हो या 36 किलोमीटर किराया पूरा देना पड़ता है। इसके पहले कार का किराया 150 और कमांडर जीप का 100 रुपये था। इस मार्ग पर रोडवेज की बसें नहीं चलती हैं। यही वजह है कि प्राइवेट वाहनों के संचालकों द्वारा मनमाना किराया वसूला जा रहा है।
बक्सर रेलवे स्टेशन पर जिले के यात्री बड़ी तादाद में उतरते हैं। ऐसे में प्राइवेट वाहन चालकों द्वारा यात्रियों का आर्थिक दोहन किया रहा है। भरौली से बक्सर रेलवे स्टेशन की दूरी छह किलोमीटर है, जबकि किराया 30 रुपये प्रति सवारी लिए जा रहा हैं। अधिक किराया वसूली को लेकर आए दिन यात्रियों एवं वाहन चालकों के बीच कहासुनी भी हो जा रही है फिर भी पुलिस और जिला प्रशासन मूक दर्शक बनी हुई है।
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इंजन किसी वाहन का, चेचिस किसी की
नरही। बलिया बक्सर मार्ग पर चलने वाले अधिकांश प्राइवेट वाहन खटारा तो है ही इनके कागजात भी सही नहीं है। इस मार्ग पर पांच दर्जन से ज्यादा एंबेस्डर कारें सड़कों पर बेखौफ दौड़ चल रही है। इन गाड़ियों में इंजन किसी और गाड़ी का तो चेचिस किसी और गाड़ी का लगा हुआ है। गाड़ी हैं प्राइवेट, लेकिन ढ़ो रही है सवारी। कुछ ऐसा ही हाल कमांडर जीपों का भी है। यह भी जुगाड़ पर ही चल रही हैं। परिवहन विभाग जिस दिन नजरें इधर घुमाता है उस दिन ये खटारा वाहन नहीं दिखते हैं, फिर सड़कों पर दौड़ने लगते हैं।
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