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जमाखोरी से बढ़े रिफाइंड के दाम, रुस-यूक्रेन यद्ध की आड़ में हो रहा खेल

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बलिया। रूस के हमलों का रिफाइंड पर असर बताकर जमाखोरों ने लोगों की जेब काटने का काम शुरू कर दिया है। वह बाजार में रिफाइंड की आपूर्ति कम करके पुरानी एमआरपी वाले रिफाइंड पर 25 से 30 रुपये अधिक ले रहे हैं।
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शहर के राजेंद्र नगर मोहल्ला निवासी सीमा सराफ पड़ोस की परचून की दुकान पर रिफाइंड लेने गईं तो उन्हें इसका एहसास हुआ एक सप्ताह पूर्व एक लीटर का जो रिफाइंड का पैकेट उन्हें 145 रुपये में मिला था। इस बार वह पैकेट उसी एमआरपी पर होने के बावजूद दुकानदार ने 175 रुपये में दिया। व्यापारी विनोद कुमार ने बताया कि विश्व युद्ध के हालात बन रहे हैं, जिसकी वजह से बड़े स्टाकिस्ट ने माल रोकना शुरू कर दिया है, इससे महंगाई बढ़ रही है। अब जब स्टाकिस्ट ही प्रति लीटर पंद्रह से बीस रुपये बढ़ाकर माल दे रहे हैं तो महंगा माल बेचना हमारी भी मजबूरी है। कुछ असर होली का भी बाजार में दिख रहा है। लोगों का मानना है कि यूक्रेन लड़ाई के कारण यह समस्या पैदा हुई है। इसी के प्रभाव से रिफाइंड की काला बाजारी प्रारंभ हुई है। जंग शुरू होने के पहले 145 रुपये प्रतरि लीटर बिकने वाला रिफाइंड बुधवार को 170 रुपये प्रति लीटर की दर बजार में बिका।
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दुकानदार रामविलास महाजन का मानना है कि अगर यह जंग अभी खिंचती है, तो होली तक रिफाइंड के रेट 200 रुपये प्रति लीटर से भी ऊपर पहुंच सकते हैं।
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दुकानदार रोहित कश्यप ने कहा कि स्टॉकिस्ट रिफाइंड देने में कंजूसी बरत रहे हैं। किसी भी फुटकर विक्रेता को पांच से छह लीटर ही रिफाइंड दिया जा रहा है। बृहस्पतिवार को स्टाकिस्टों ने थोक में 165 लीटर के हिसाब से रिफाइंड की बिक्री की है।
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गृहिणी रिंकू यादव कहती हैं कि लड़ाई का असर हो या न हो, लेकिन यहां पर रिफाइंड की किल्लत हो गई है। वह पांच दिन में 25 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया है। सब्जी तो पहले से महंगी है। ऐसे में रिफाइंड और सरसों के तेल का दाम भी बढ़े हैं।
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गृहिणी सरिता का कहना है कि रिफाइंड की महंगाई के कारण सरसों के तेल के भाव बढ़ गए हैं। तीन दिन में सरसों का तेल प्रति किलो 210 रुपये पहुंच गया है। ऐसे में रसोई का बजट बिगड़ गया है। यही स्थिति रही, तो लोगों को बिना तेल की सब्जी से ही पेट भरना होगा।
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गृहिणी आशा देवी कहती हैं कि रिफाइंड मंहगा होने पर सरसों का तेल दुकानदारों ने मंहगा कर दिया है। जबकि यहां पर सरसों की अच्छी पैदावार होती है। ऐसे में तेल की महंगाई जान बूझकर दुकानदार उत्पन्न कर रहे है।
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