बलिया। देशव्यापी आह्वान के तहत बलिया जनपद में एक भव्य जनसभा और जुलूस प्रदर्शन का आयोजन किया गया। केंद्र व राज्य सरकार द्वारा श्रमिक हितों की लगातार उपेक्षा, महंगाई, बेरोजगारी, निजीकरण और न्यूनतम वेतन की अनदेखी पर गहरी चिंता व्यक्त की गई।
जिले के विभिन्न हिस्सों से भारी संख्या में श्रमिक, कर्मचारी, किसान, युवा, महिलाएं, स्कीम वर्कर्स तथा सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे। इस दौरान जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा। हाथों में बैनर-पोस्टर और नारे लगाते हुए निकले।
चारों श्रम संहिताओं (कोड्स) को अविलंब रद्द किया जाए। न्यूनतम वेतन 26,000 प्रतिमाह सुनिश्चित किया जाए। काम के अधिकतम 8 घंटे के नियम को सख्ती से लागू किया जाए। विक्रय संवर्धन कर्मियों के लिए न्यूनतम वेतन सलाहकार बोर्ड में उप-समिति गठित की जाए। असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा की ठोस व्यवस्था की जाए। स्कीम वर्कर्स – जैसे आंगनबाड़ी, आशा, और मिड-डे मील कार्यकर्ता – को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
रिटायरमेंट के बाद पेंशन व पीएफ की सुविधा मिले। सार्वजनिक उपक्रमों, विशेष रूप से पूर्वांचल व दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम सहित, के निजीकरण पर रोक लगे और सार्वजनिक निवेश से रोजगार बढ़ाया जाने आदि मांगे रहीं।