मध्य प्रदेश में मूसलाधार बारिश से केन बेतवा और यमुना के पानी में बढ़ाव का असर यहां भी दिख रहा है। जिले में गंगा के जलस्तर में बढ़ाव दर्ज किया गया है। इसके चलते कटान भी तेज हो गया है। सोहांव ब्लाक के कोटवां नारायणपुर से लेकर द्वाबा के मांझी पुल तक करीब 85 किमी के क्षेत्र में गंगा किनारे हजारों एकड़ में बोई गई सब्जी की खेती नष्ट हो चुकी है। नदी में बाढ़ और बैक रोलिंग कटान से कई गांवों में खलबली मची है। तट पर बसे लोगों की नींद हराम है। कटान से जगदीशपुर, कई गांवों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
लालगंज संवाददाता के मुताबिक क्षेत्र के जगदीशपुर गांव में 20 परिवारों का रिहायशी मकान कभी भी गंगा में समाहित हो सकता है। गंगा के कटान से कृषि योग्य भूमि भी धीरे-धीरे गंगा में विलीन होती जा रही है। पिछले कई सालों से गंगा के कटान के कारण बड़े काश्तकार भी आज भूमिहीन हो चुके हैं। क्षेत्र के बहुआरा, मुरारपट्टी के किसान परवल की खेती कर जीविका चलाते थे लेकिन गंगा की कटान से उनके इस व्यवसाय पर ग्रहण लग गया है। इसके लिए किसानों ने कई बार तहसील प्रशासन सहित जिलाधिकारी से मदद की गुहार की लेकिन आश्वासन के सिवाय आर्थिक मदद के नाम पर एक फूटी कौड़ी भी नहीं मिली।
ऐसे में गांव के कटान पीड़ितों का दर्द अनायास ही छलक पड़ता है। कटान पीड़ितों का कहना है कि शासन-प्रशासन आज तक आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं दिया। दर्जनों मकान कटान के मुहाने पर हैं फिर भी लोग उसी मकान में किसी तरह डर-डर कर गुजारा करने को विवश हैं। कटान पीड़ितों का कहना है कि आखिर हम इस घर को छोड़ दें तो अपना सिर छुपाने कहां जाएं। वर्तमान में पेट की आग बुझाना मुश्किल है, ऐसे में सिर छुपाने के लिए ठौर की तलाश करना कठिन है।
रामगढ़ संवाददाता के मुताबिक गंगा के जलस्तर में निरंतर वृद्धि का जारी है। गंगा के उग्र रूप से पहले ही सदर तहसील में रहने वाले लोग अपने घरौंदों को खुद उजाड़ना शुरू कर दिए हैं। इससे लोगों में दहशत है कि गंगा ने लाल निशान पार किया तो सामानों को समेटने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।
केंद्रीय जल आयोग गाय घाट के अनुसार मंगलवार को 12 बजे तक गंगा का जलस्तर 55.30 मीटर दर्ज किया गया। प्रतिघंटा दो सेमी का बढ़ाव बना हुआ है। जबकि खतरा बिंदू 57.615 मीटर है। गंगा के जलस्तर में वृद्धि के चलते मछु़आरों की रोजीरोटी पर ग्रहण लग गया है। मछुआरा दिनेश का कहना है कि गंगा के जलस्तर में तेज बहाव होने के चलते मछली पकडने मुश्किल हो गया है। जब तक गंगा का जलस्तर अपने पेटे में नहीं जाएगा। तब तक हम लोगों की दशा राम भरोसे है।