बलिया। ग्राम न्यायालय के विरोध में वकीलों का धरना प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी रहा। इस दौरान वकीलों ने सिविल कोर्ट परिसर के सभी गेट पर तालाबंदी कर निगरानी रखा। करीब दो बजे के बाद कोर्ट परिसर का दरवाजा खोला गया, जिसके बाद वादकारियों ने अपने-अपने मुकदमे से संबंधित तारीख नोट किए।
दी सिविल बार एसोसिएशन तथा क्रिमिनल बार एसोसिएशन की ओर से तालाबंदी और धरना प्रदर्शन के क्रम में शुक्रवार को सिविल कोर्ट परिसर के बाहर मौजूद वकीलों ने केंद्र व प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारे बुलंद किए। इस दौरान न्यायालय के सभी मुख्य द्वार पर तालाबंदी करते हुए सरकार के गलत नीतियों के प्रति आक्रोश जताया।
अधिवक्ताओं ने कहा कि बागी धरती पर ग्राम न्यायालय के विरोध में किए गए आंदोलन मील का पत्थर साबित होगा। धीरे-धीरे ही सही बलिया के अधिवक्ताओं का आंदोलन जोर पकड़ता जा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आसपास के जनपदों में भी बलिया के आंदोलन का समर्थन मिलना शुरू हो गया है। सरकार इसके बाद भी नहीं चेतती है तो हम उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होंगे। जिसकी सारी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।
वकीलों ने न्यायालय परिसर में चल रहे कोर्ट में भी घूम कर न्यायालयों में होने वाले कामकाज को ठप कराया। न्यायालय परिसर में पीठासीन अधिकारी बैठे जरूर रहे, लेकिन कामकाज न के बराबर हुआ। इस मौके पर अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए क्रिमिनल बार के अध्यक्ष देवेंद्र मिश्र ने कहा कि बलिया ऐतिहासिक जिला रहा है और हम बलिया के अधिवक्ता इस आंदोलन को तब तक चलाएंगे जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं हो जाती है। हम किसी भी सूरत में सिविल कोर्ट परिसर में होने वाले नए कार्य में सहयोग नहीं करेंगे।