उत्तर प्रदेश एवं बिहार परिवहन निगम के बीच बसों का परिचालन निश्चित तौर पर एक ऐतिहासिक फैसला है। बसों के चालू होने से यात्रियों को फजीहत से निजात मिलेगी। लेकिन सवाल यह भी है कि यूपी-बिहार को जोड़ने वाला भरौली में वीर कुंवर सेतु जर्जर होने पर 12 मई 2014 से लोहे का एंगल लगाकर भारी वाहनों को रोक दिया गया है।
ऐसे में बलिया-बक्सर रूट पर बसों का परिचालन कैसे संभव है। नए पुल बनने का काम शुरुआती दौर में है। संभावना है कि पुल बनने में चार साल का समय लग सकता है। ऐसे में इतने दिनों तक इस रूट पर बसों का संचालन बंद होने से यात्री अपनी मंजिल तक कैसे पहुंचेंगे। जैसा कि एनएच-31 पर बलिया से भरौली मार्ग पर रोडवेज की एक भी बस नहीं चलती है। इस मार्ग पर वाराणसी के लिए भी कोई बस नहीं है। गाजीपुर डिपो की बसें भरौली तक ही आती-जाती है। जिससे यात्रियों को बिहार आने-जाने के लिए दूसरे साधनों का उपयोग करना पड़ता है।
वीर कुंवर सिंह पुल के बगल में नया पुल का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। उम्मीद है कि पुल चालू होने के बाद बस यात्रा बहाल हो पाएगी। दोनों राज्यों के बीच रूटों पर गौर फरमाया जाय तो बलिया, बक्सर, आरा, पटना रूट, बलिया, बक्सर, फेफना, चितबडग़ांव, भरौली, उजियार रूट। बलिया भरौली बक्सर रूट। मऊ, गहमरबारा, वाया बहादुरगंज, सलामतपुर, सिधागर घाट, रसड़ा, प्रधानपुर, लक्षुडीह, बसनिया, उजियार, भरौली, बक्सर रूट। बलिया से बेल्थरा, मैरवा, सिवान। बलिया मांझीघाट, छपरा रूट है। इस रूट पर दोनों तरफ से बसें आएंगी और जाएंगी।
बलिया से सीवान और छपरा के लिए बसों का परिचालन आसानी से शुरू हो जाएगा। लेकिन बलिया-बक्सर जाने के लिए वीर कुंवर सेतु पार कर ही बक्सर जाना होता है। ऐसे में वीर कुंवर सिंह सेतु पर भारी वाहनों के आवागमन पर रोक होने के कारण इस रूट पर बसों आदि का परिचालन ठप हो जाएगा। साथ ही साथ बगल के पुल का निर्माण कार्य अभी प्रारंभिक स्तर पर है, ऐसे में क्या चार वर्षों तक बस सेवा बाधित रहेगी!