तेजी से बढ़ती हुई आबादी के मद्देनजर सुलभ यातायात जिले को जितनी आवश्यकता है, परिवहन महकमा उसे सुलभ करा पाने में नाकामयाब है। प्रदेश में चहूंमुखी विकास का दंभ भरने वाली सरकार बलिया के विकास पर शायद तनिक भी गंभीर नहीं है। तभी तो बलिया डिपो से1989 में जहां नसीरपुर, हाल्ट, हजौली, उजियार, कारो, चितबड़ागांव से लेकर गोरखपुर तक बसों का संचालन होता था, अब इन रूटों पर बसों की संख्या नगण्य है।
कहना न होगा कि यहां से गोरखपुर तक के लिए बसों की प्रतीक्षा में यात्रियों को भटकना पड़ता है। इसके पीछे के कारण पर नजर डाले तो विभाग का कहना है कि चालकों-परिचालकों की कमी की वजह से कई रुटों पर बसों का परिचालन नहीं हो पा रहा है, जिससे यात्रियों को मजबूरी में प्राइवेट वाहनों या बसों का सहारा लेना पड़ रहा है। यही नहीं बहुत से ऐसे मार्ग है जहां बसों का संचालन होता ही नहीं है।
कई बार रेवती-बैरिया क्ष्ेात्र के लोगों ने रोडवेज की बस चलाने के लिए अपने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से लगायत शासन-प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। ऐसे में सरकारी बसों की कमी का फायदा निजी बस संचालक यात्रियों की जेब पर डाका डाल उठाने से नहीं चूकते। ऐसे में यात्रियों का कहना है कि डिपो से पहले जितनी बसों का संचालन शुरू करा दिया जाता है तो विभिन्न ग्रामीण इलाकों से जिला मुख्यालय आने वाले लोगों को काफी सहूलियत मिलेगी।