बैरिया। गाजीपुर से मांझी तक 120 किलोमीटर एनएच 31 के सुदृढ़ीकरण का कार्य बृहस्पतिवार को शुरू हो गया। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर नवीन मिश्र की मौजूदगी में भाजपा के जिलाध्यक्ष जयप्रकाश साहू और सांसद पुत्र विपुलेंद्र प्रताप सिंह ने जेसीबी मशीन के सामने नारियल फोड़ और भूमि पूजन करा कर मरम्मत काय शुरू कराया।
प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने बताया कि गाजीपुर रौजा चौराहा से बलिया जनपद के मांझी घाट सेतु के निकट बिहार की सीमा तक सुदृढ़ीकरण का कार्य किया जाएगा। प्रथम चरण में मांझी से बेलहरी तक सड़क पर बने गड्ढे में गिट्टी गिरा कर स्टोन डस्ट डालने का कार्य किया जाएगा। बरसात में यह कार्य सबसे अच्छी तरह से होता है। इसलिए इसी कार्य से शुभारंभ हो रहा है। बताया कि मांझी से बेलहरी तक सड़क की स्थिति अच्छी नहीं है। इसलिए इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर कराया जा रहा है। 103 करोड़ 45 लाख 47 हजार 661 रुपये की लागत से यह कार्य होना है। मानसून शुरू होने तथा दैनिक यात्रियों की सुरक्षा के दृष्टिगत मेसर्स कृष्ण इंफ्रास्ट्रक्चर के ठेकेदार को निर्देशित किया गया है कि सड़क पर बने गड्ढों का दुरुस्त कराएं। मानसून समाप्त होने के बाद चयनित ठेकेदार द्वारा सड़क के विशेष रखरखाव मरम्मत का कार्य तेजी से कराया जाएगा। कहा कि अगले 15 से 20 दिनों में सड़क पर बने गड्ढे को दुरुस्त कर दिया जाएगा ताकि इस मार्ग से आने जाने वाले वाहनों व यात्रियों को कोई किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। इस मौके पर अमिताभ उपाध्याय, पूर्व ब्लाक प्रमुख कन्हैया सिंह, दुर्गविजय सिंह झलन, रामप्रकाश सिंह, रत्नेश सिंह, अश्वनी ओझा, सुशील पांण्डेय, राजेश सिंह, बड़क सिंह, मंटू बिन्द, शैलेश पासवान, रंजीत वर्मा आदि रहे।
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एक साल में पूरा होगा कार्य
बैरिया। एनएच 31 सड़क निर्माण की दुर्दशा को लेकर अमर उजाला की ओर से प्रकाशित समाचारों का जिक्र करते हुए एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर नवीन मिश्र ने कहा कि अमर उजाला ने महीनों में कई कई दिनों तक समाचारों के माध्यम से सड़क निर्माण के लिए मुहिम चलाई थी। अब सड़क निर्माण कार्य शुरू हो रहा है और इस कार्य के निर्माण का समय सीमा 12 माह के अंदर पूरा कर लिया जाएगा।
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कई बार युवा व समाजसेवियों ने किया आंदोलन
बैरिया। एनएच 31 के मरम्मत की मांग को लेकर क्षेत्र के युवाओं व समाजसेवियों ने कई बार आंदोलन किया। अभी कुछ दिन पहले सपा नेताओं द्वारा सड़क के गड्ढों में धान रोपने व मछली पालने का कार्य करके आंदोलन किया गया था। लेकिन अब लोगों ने राहत की सास ली है।