रतसर कस्बा स्थित बदहाल पड़ा बैजू पुर का पोखरा।
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संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक माने जाने वाले तालाब और पोखरे बदहाल है। जल संरक्षण के साथ तालाब व पोखरों को संरक्षित करने का प्रदेश सरकार का फरमान हवा हवाई साबित हो रहा है। तालाब और सरोवर धीरे-धीरे अस्तित्व खोते जा रहे है लेकिन इनको बचाने का प्रयास कहीं से भी नहीं हो रहा है।
आज भी कई तरह के पूजा पाठ धार्मिक अनुष्ठान इन तालाबों के तट पर ही किए जाते है। आर्थिक संपन्नता के चलते जहां लोगों में तालाबों के प्रति बेरूखी है वहीं इनका लगातार अतिक्रमण होने से इनका अस्तित्व खतरे में है। कसबा क्षेत्र के सभी दिशाओं में पक्के घाट वाले पोखरे कन्या जी का पोखरा , बैजूपुर का पोखरा, बीका भगत का पोखरा, बाबा का पोखरा , नागा जी पोखरा सहित निकटवर्ती जनऊ पुर का ऐतिहासिक पोखरा शासन प्रशासन की अनदेखी से आज अपना अस्तित्व धीरे-धीरे खोते जा रहे है। दशकों पूर्व तक इन पोखरों में नहाने के लिए लोगों की भीड़ जुटती थी। वर्तमान में इन पोखरों के रख-रखाव के चलते जलकूम्भी से पानी स्नान करने लायक नहीं रह गया है। इन पोखरों के आसपास गंदगी का अंबार लगा हैं। पक्के घाट टूट-टूट कर जमींदोज होते जा रहे है।
जनऊ पुर स्थित पोखरे के जीर्णोद्धार के लिए बीते नवंबर में गांव आये मंत्री उपेंद्र तिवारी ने मंच से घोषणा की कि जल्द ही पोखरे की बाउंड्री बनाने के साथ कायाकल्प किया जायेगा। लेकिन आजतक इस दिशा में कुछ भी ना होने से गांववासी मायूस है। गांव निवासी धनेश पाण्डेय , करीमन राम, मानवेंद्र पाण्डेय, मनोज आदि ने संबंधित विभाग सहित डीएम से क्षेत्र के पोखरों व तालाबों को संरक्षित करने की मांग की है।