21 की उम्र तक सुधार गृह, फिर सीधे जेल
यह फैसला सिर्फ सजा नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था का एक बेहद सख्त संदेश है। एडीजे (पॉक्सो) प्रथम कांत की अदालत ने शुक्रवार को आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा की एक विशेष रूपरेखा तय की। कोर्ट के आदेशानुसार, दोषी किशोर को 21 वर्ष की आयु पूरी होने तक गाजीपुर के विशेष बाल गृह के अधीक्षक की निगरानी में रखा जाएगा। इस दौरान उसकी शिक्षा, मानसिक और शारीरिक विकास की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
फिर कटेगी असली सजा
जैसे ही मुजरिम 21 साल की उम्र का पड़ाव पार करेगा, उसके लिए किसी भी तरह की रियायत खत्म हो जाएगी। उसे अपनी बाकी बची हुई लंबी सजा काटने के लिए सीधे मऊ जिला जेल में शिफ्ट कर दिया जाएगा।
क्या था पूरा मामला?
विशेष लोक अभियोजक विमल कुमार राय के मुताबिक, जुर्म की यह दास्तान 15 जुलाई 2023 की है। बलिया के पखरी थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली 13 साल की बच्ची सुबह के वक्त शौच के लिए घर से बाहर निकली थी। तभी देवरिया जिले के सलेमपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले इस 16 वर्षीय किशोर ने उसे अपने जाल में फंसाया और बहला-फुसलाकर उसका अपहरण कर लिया।
दाखिल की गई मजबूत चार्जशीट
घटना के बाद बच्ची की मां ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया। पुलिस ने बिना देरी किए आईपीसी और पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और तफ्तीश पूरी कर कोर्ट में मजबूत चार्जशीट दाखिल की। अंततः, सबूतों और कानून की ताकत ने यह सुनिश्चित किया कि मासूम की जिंदगी से खेलने वाले को उसके किए की पूरी और कड़ी सजा मिले।