सिविल सेवा पुरस्कार समारोह को संबोधित करते प्रधानमंत्री
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रसड़ा क्षेत्र के माधवपुर गांव स्थित दी किसान चीनी मिल तथा नागपुर की कताई मिल इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही हैं। 1983 में कताई मिल तथा 1974 में चीनी मिल की नींव रखी गई थी, जिससे हजारों कर्मचारी अपने परिवार का भरण पोषण करते थे।
लेकिन सरकारी उपेक्षा और लचर प्रबंधन से सन 2000 में कताई मिल तो 2013 में रसड़ा चीनी मिल बंद हो गई। लोगों ने सड़क से लेकर सदन तक हर जगह आवाज उठाई लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। दोनों मिलों के बंद होने से न केवल उनमें काम करने वाले दो हजार से अधिक कर्मचारी बेकार हो गए, वरन इस झटके से बलिया का औद्योगिक विकास पटरी से जो उतरा तो फिर कभी आगे नहीं बढ़ पाया।
क्या मिलों के कर्मचारी और क्या आम जन यह टीस सबकी जुबां पर आ ही जाती है कि सबके वोटे के चिंता रहे ला बाकी मिल के बात के हू न करे ला। प्रधानमंत्री जी पहल करीं त बलिया के विकास पटरी पर आ सके ला..।