वाराणसी। डीएम रविंद्र कुमार मंगलवार को विकासखंड बांसडीह के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और खंड विकास अधिकारी कार्यालय पहुंचे। अनियमितिता मिलने पर फार्मासिस्ट को सस्पेंड करने और प्रभारी चिकित्सक पर विभागीय कार्रवाई के लिए कहा। साथ ही मौके पर गैरहाजिर रहे खंड विकास अधिकारी का वेतन रोकने के लिए कहा।
डीएम ने सीएचसी के फार्मासिस्ट और प्रभारी चिकित्सक से स्वास्थ्य केंद्र संचालन व खंड विकास अधिकारी कार्यालय के लेखाकार से वहां से संचालित व्यवस्था के बारे में जानकारी ली। सीएचसी के निरीक्षण के दौरान आपातकाल कक्ष की व्यवस्था को देखी। मरीजों के बेड पर कंबल न मिला। एक तीमारदार ने शिकायत की कि दवाएं और मरीज को चढ़ाने के लिए बोतल बाहर से लाया है। इस पर जिलाधिकारी ने प्रभारी चिकित्सा और फार्मासिस्ट से नाराजगी जताई। साथ ही फार्मासिस्ट को निलंबित करने और प्रभारी चिकित्सक पर विभागीय कार्रवाई करने का निर्देश दिया। दवा स्टोर रूम में दवाओं को बेतरतीब ढंग से रखने और साफ सफाई को लेकर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की और तीन दिन के अंदर साफ सफाई और दवाओं की उपलब्धता की रिपोर्ट एसडीएम बांसडीह को देने को कहा। जिलाधिकारी ने प्रभारी चिकित्सक को 15 दिन में सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के लिए कहा।
विकास के लिए आई हो गए डंप
ब्लाक के निरीक्षण के दौरान उपस्थिति, मूवमेंट और ग्रांट रजिस्टर को चेक किया। खंड विकास अधिकारी हस्ताक्षर करके मौके से गायब मिले। जिलाधिकारी ने उनका वेतन रोकने के लिए कहा। जब ग्रांट रजिस्टर चेक किया तो पाया कि विभिन्न मदों जैसे सांसद निधि, विधायक निधि, केंद्र और राज्य वित्त में आवंटित धनराशि पड़ी हुई है। सांसद और विधायक निधि के 1.39 करोड़ रुपये डंप मिले। राज्य वित्त में 86 लाख रुपये डंप मिले। उन्होंने उसके खर्च के बारे में खंड विकास अधिकारी से पूरी कार्य योजना मांगी। निरीक्षण के दौरान एसडीएम बांसडीह राजेश गुप्ता मौजूद रहे।