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सरयू नदी के घटाव से दियारे क्षेत्र के लोगों ने ली राहत की सांस

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सिकंदरपुर। सरयू का जलस्तर घटने से लोगों को राहत मिली है लेकिन फसल डूबने से चारे का संकट पैदा हो गया है। अब ग्रामीणों को कटान का भय सताने लगा है। दियारे की उपजाऊ भूमि पानी कम होते ही कट -कट कर नदी में विलीन होती है। सर्वाधिक तेज कटान क्षेत्र के दियारा खरीद एवं सीसोटार के मगही में होता है। दोनों दियारों में अब तक करीब 100 बीघा से अधिक जमीन नदी में विलीन हो चुकी है।
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सरयू नदी का यह कटान पिछले दो दशक से ज्यादा समय से हो रहा है। कटान के चलते विभिन्न दियारों के सैकड़ों किसानों के जमीन का रकबा घट गया है। दर्जनों किसान भूमिहीन हो चुके हैं। सपा के जिला सचिव मुन्नी लाल चौधरी ने कहा कि बाढ़ की स्थिति से दियारा क्षेत्र के लोगों का जनजीवन अस्त व्यस्त है, जहां किसान पैसा लगाकर खेती की थी आज वह खेती बर्बादी की कगार पर है। कोई भी अधिकारी किसानों का हाल जानने नहीं आया और ना ही काजीपुर में बाढ़ चौकी बनाई गई। रेवती: नदी सरयू का पानी घट रहा है। पानी धीरे धीरे नदी के पेटा की ओर सिमट रहा है लेकिन टीएस बंधा के उत्तर में स्थित खेतों में बाढ़ का पानी अभी भी जमा पड़ा है। नदी के बाढ़ क्षेत्र में पड़ने वाले गांव नवका गांव, नवका गांव आंशिक, मठ नागनाथ, धूपनाथ का डेरा, बैजनाथ का डेरा आदि गांव तथा पुरवे नदी के पानी से घिरे हैं। धूपनाथ का डेरा निवासी पूर्व प्रधान वशिष्ठ नगर धूप नाथ यादव ने बताया कि दो सप्ताह से अधिक समय से खेतों में लगे पानी के कारण मक्का की लगभग पूरी फसल तथा नीची भूमि पर रोपे गए धान बर्बाद हो चुके हैं। मवेशियों का हरा चारा भी नष्ट हो गया है। धूपनाथ तथा बैजनाथ के डेरा के लिए एक एक नौका लगाई गई है फिर भी आवागमन में घोर कठिनाई हो रही है।
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