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बाढ़ को लेकर तटवर्ती इलाकों के लोगों की बढ़ी धड़कनें, प्रशासन जुटा तैयारियों में

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इस बार मानसून ने समय से पहले दस्तक दे दी और झमाझम बारिश हो रही है। जिससे नदियों का जलस्तर धीरे धीरे बढ़ रहा है। खासकर गंगा व सरयू में काफी पानी आ चुका है। जिससे लोगों की धड़कनें बढ़ने लगी हैं। सरयू का पानी तो कुछ क्षेत्रों में फैल भी चुका है। इसको देखते हुए प्रशासन भी बाढ़ से निपटने की तैयारियों में जुटा है।
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बाढ़ से जिले के 384 गांवों के 400566 जनसंख्या प्रभावित हो सकती है और 48363 हेक्टेयर क्षेत्रफल प्रभावित हो सकती है। प्रशासन ने 61 बाढ़ चौकियों को स्थापित किया है और 70 बाढ़ शरणालय स्थल बनाने की तैयारी में है। इसके अलावा 92 राहत शिविर भी बनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। जिला पंचायत की ओर से पंजीकृत 190 नावों को अलर्ट करते हुए ग्रामीण इलाकों में संचालित नावों के नाविकों को अलर्ट किया गया है।
जिले में गंगा व सरयू दो प्रमुख नदियां हैं। गंगा नदी जनपद में सोहांव ब्लॉक के नारायणपुर गांव के पास प्रवेश करती हैं और बैरिया तहसील के जयप्रकाश नगर गांव के पास जनपद की सीमा को छोड़ते हुए बिहार के छपरा जनपद में प्रवेश कर जाती हैं। इस तरह जिले में नदी की कुल लंबाई 90 किमी है। जिले के दो तहसील क्षेत्रों के गांव गंगा नदी की बाढ़ से कमोवेश हर साल प्रभावित होते हैं। इससे कुल 201 गांव के 25980 हेक्टेयर क्षेत्रफल व 363845 जनसंख्या प्रभावित होती है। इसी तरह सरयू नदी जिले में बेल्थरा रोड तहसील के सोनाडीह गांव के पास प्रवेश करती हैं और बैरिया तहसील के जयप्रकाश नगर गांव के पास गंगा में मिल जाती हैं। इस तरह इस नदी का जिले में कुल बहाव 166 किमी लंबाई में है। सरयू की बाढ़ से चार तहसीलों बेल्थरा रोड, सिकंदरपुर, बांसडीह व बलिया सदर के गांव प्रभावित होते हैं। इसके अलावा जिले में 25 किमी की लंबाई में टोंस उस नदी भी बहती है। यह नदी रसड़ा तहसील के प्रधानपुर गांव के पास जनपद में प्रवेश करती है तथा सदर तहसील के बघेजी गांव के पास गंगा में मिल जाती है। यह नदी भी बरसात के दिनों में बाढ़ आने के बाद काफी तबाही मचाती है। इन नदियों में बाढ़ आने के बाद बड़ी आबादी सड़कों या तटबंधों पर रहने को मजबूर होती है और फसलें भी बर्बाद हो जाती हैं। इन दिनों गंगा व सरयू का जलस्तर बढ़ने लगा है। इसे देखते हुए प्रशासन की ओर से तैयारियां तेज कर दी गई हैं। बाढ़ चौकियों को स्थापित किया गया है और नावों को तैयार रखा गया है।
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जनपद में हैं 298 नाव, 25 गोताखोर व 8 जाल
बलिया। जिले में बाढ़ से बचाव के लेकर उपलब्ध संसाधनों पर नजर डालें तो कुल 290 नाव, 25 गोताखोर व 8 जाल हैं। इसमें सदर तहसील में 37 बड़ी, 116 मझोली नावें हैं। इसके अलावा तहसील क्षेत्र में 18 गोताखोर व 8 जाल हैं। इसी तरह बांसडीह तहसील में 9 बड़ी, 11 मझोली नाव तथा 7 गोताखोर उपलब्ध हैं। बैरिया तहसील में कुल 21 बड़ी व 37 मझोली नाव है। इसके अलावा सिकंदरपुर तहसील में दो बड़ी व 32 मझोली, रसड़ा में 16 मझोली, बेल्थरारोड में एक बड़ी व 16 मझोली नावें है। अपर जिलाधिकारी ने बताया कि सभी नाविकों को अलर्ट रहने को कहा गया है।
सीएमओ को दिए गए निर्देश
बलिया। जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए दवा आदि का इंतजाम करने का निर्देश सीएमओ को दिया गया है। बाढ़ के दौरान संक्रामक बीमारियों से बचाव को लेकर तैयारियां कर लेने को कहा गया है।
नदियों में बढ़ते जलस्तर के बाद बाढ़ को लेकर प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में बाढ़ चौकियां, राहत शिविर, शरणालय आदि के इंतजाम किए गए हैं। बाढ़ आने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारियां भी कर ली गई हैं।
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- राम आसरे, एडीएम, बलिया।
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