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गांवों में जैसे-तैसे पहुंचे मजदूरों को लेकर लोग हैं चिंतित

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बैरिया। क्षेत्र के कई गांवों के मजदूर गैर जनपदों और प्रांतों से लौट कर घर पहुंचे हैं जिनकी न तो थर्मल स्क्रीनिंग हुई और न ही कहीं क्वारंटीन ही किया गया। ऐसे लोग होम क्वारंटीन भी नहीं है। ऐसे प्रवासी मजदूरों की घर वापसी को लेकर संबंधित गांवों के लोग संक्रमण फैलने को लेकर भयभीत हैं। लॉकडाउन के बाद बीते एक माह के अंदर चाईछपरा, विशुनपुरा, मानगढ़, शिवाल, गोपालनगर, बशिष्ठनगर, मधुबनी, कोटवां, मिर्जापुर, श्रीकांतपुर, दुर्जनपुर, श्रीनगर, चकिया, जमालपुर सहित कईगांवों में गैर प्रांतों से औसतन 10 से 50 मजदूर पैदल या अन्य साधनों से पहुंचे हैं। इनका न तो कहीं जांच पड़ताल हुई और न ये क्वारंटीन रहे। कई ऐसे भी लोग घरों को पहुंचे है जिन्हें तीन दिन से छह दिन तक क्वारंटीन रखने के बाद होम क्वारंटीन के लिए घर जाने दिया गया। इनको स्वास्थ्य विभाग की ओर से घरों पर चिपकाने के लिए पोस्टर दिए गए लेकिन किसी भी गांव में पोस्टर नहीं दिख रहा। पैदल व अन्य साधनों से गांव में आए प्रवासी मजदूरों को देेख हर कोई उस परिवार को शक की नजर से देखने लगे हैं। उस घर का पूरे गांव में चर्चाओं का दौर शुरू हो जा रहा है।
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गैर प्रांतों से आने वाले मजदूरों का स्वास्थ्य परीक्षण जरूरी है। साथ ही उन्हें अपने परिवार के सदस्यों के संपर्क से दूर रह कर होम क्वारंटीन रहना उचित होगा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा होम क्वारंटीन के निर्देशों का पालन नहीं करना घातक भी हो सकता है। -डॉ. विजय कुमार यादव, अधीक्षक, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, सोनबरसा
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