क्षेत्र के दादा के छपरा अखार स्थित बाबा चूपशाह वारसी की मजार कौमी एकता की मिसाल है। यह नजारा सोमवार की रात बाबा के मजार पर लगे उर्स मेले में देखने को मिला।
यहां क्षेत्र के मुस्लिम बंधुओं के साथ-साथ सैकड़ों की संख्या में हिंदू भी बाबा की मजार पर चादर चढ़ाकर दुआ मांगने पहुंचे।
प्रत्येक वर्ष की तरह इस साल भी उर्स इंतजामियां कमेटी द्वारा बाबा के मजार पर उर्स का आयोजन किया गया। इस मौके पर कमेटी के संरक्षक मौलाना अजहर हुसैन ने तकरीर के दौरान कहा कि इस्लाम सलामती और शांति का पैगाम देता है।
इस्लाम में आतंकवाद और दहशतगर्दी का कोई स्थान नहीं है। कहा कि जो लोग धर्म और मजहब की आड़ में आतंक फैला रहे हैं उनका किसी भी धर्म से कोई लेना-देना नहीं है।
उनका मात्र एक उद्देश्य है, दहशत फैलाकर अपना स्वार्थ सिद्ध करना है। मौलाना ने बताया कि जो भी श्रद्धा के साथ बाबा के मजार पर सिर झुकाते हैं और चादरपोशी करते हैं उनकी सारी मुरादें बाबा पूरी करते हैं।
इसके पहले बाबा के मजार पर मिलादुनबी सलातो सलाम का एहतराम किया गया। रात भर चले उर्स के बाद मंगलवार की सुबह प्रात: सात बजकर 52 मिनट पर बाबा के मजार पर कुल शरीफ, चादरपोशी और गुलपोशी का कार्यक्रम संपन्न हुआ। तत्पश्चात उर्स का समापन हुआ।
इस मौके पर सदर शमीउल्लाह अंसारी, ग्राम प्रधान सुनिल सिंह, अख्तर अली, मुख्तार, पन्नालाल, गोगा पाठक, भोला, गुड्डन, सेराज खां, अजीत पाठक, बब्बन विद्यार्थी, रणजीत सिंह आदि मौजूद रहे।