जनपद में शासन के निर्देश के बावजूद मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले में एमबीबीएस चिकित्सक डयूटी से गायब रह रहे। चिकित्सक के अभाव में मरीजों का इलाज आयुष डाॅक्टर व फार्मासिस्टों ने किया। स्वास्थ्य विभाग आरोग्य मेले के नाम पर सिर्फ खानापूरी कर रहा है। रविवार को अचानक मौसम के बदलाव से पारा दो से तीन डिग्री कम हो गया। इससे कम इम्युनिटी वाले लोगों में सर्दी, जुकाम, बुखार, गले में खरास की समस्या बढ़ गई। ग्रामीण क्षेत्रों के करीब 81 स्वास्थ्य केंद्रों पर मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले का आयोजन हुआ। जिसमें रोगियों की संख्या ज्यादा पहुंची। मेला में सबसे ज्यादा सर्दी, जुकाम, जोड़ो में दर्द व कोल्ड डायरिया के मरीजों की संख्या ज्यादा रही। डॉक्टर के अभाव में इलाज को आए सैकड़ों मरीज निराश होकर वापस लौट गए।
जिला मुख्यालय से 25 किमी दूर नरहीं क्षेत्र के कथरियां पीएचसी पर लगे आरोग्य मेले में डाॅक्टर सुनील चंद्रा की तैनाती थी, लेकिन वह मौजूद नहीं थे। उनकी अनुपस्थिति में फार्मासिस्ट फैयाज अंसारी व वार्ड बॉय रामनिवास उदयप्रताप ने मरीजों की जांच कर दवा दी। डाॅक्टर के न रहने पर दर्जनों मरीज बिना इलाज कराए लौट गए। दौलतपुर निवासी नमिता, कथरिया निवासी लालबहादुर सिंह, विजय प्रताप, राम अवधेश सहित 19 मरीजों का इलाज किया। वहीं, मेड़वरा कलां पीएचसी पर फार्मासिस्ट रामभरोस राम द्वारा ढाई वर्षों से मरीजों का इलाज किया जा रहा रहा है। इंदरपुर नगरा पीएचसी पर लगे आरोग्य मेले में 45 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें नि:शुल्क दवा दी गई। मेले में राजकीय होमियोपैथिक अस्पताल खरुआंव के चिकित्सक डऍ. आशुतोष कुमार यादव ने भी मरीजों का परीक्षण किया। ड्यूटी पर तैनात प्रभारी चिकित्साधिकारी डाॅ. राहुल सिंह ने बताया कि मौसम के बदलाव से मरीजों की संख्या बढ़ी है।