बलिया। स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में बनने वाले कंपोस्ट गड्ढे को लेकर पंचायतें उदासीन हैं। 2103 के सापेक्ष अभी तक 1511 ही कंपोस्ट गड्ढे बने हैं। गांवों में जल निकासी की समस्या के कारण गंदगी रहती है। हालांकि इसके लिए कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं है लेकिन गांवों में जलभराव वाले स्थानों पर कंपोस्ट गड्ढे बनाने का प्रावधान किया गया है।
प्रयासों के बावजूद स्वच्छता अभियान के तहत गांवों में कंपोस्ट गड्ढा निर्माण धरातल पर नहीं उतर पा रहा है। जिले में वर्ष 2015-16 से ही स्वच्छ भारत मिशन लागू है। पांच वर्ष पूर्व यह योजना स्वच्छता अभियान के नाम से संचालित रहा। इसके तहत गांवों को साफ सुथरा रखने के लिए समय पर अलग-अलग योजनाएं भी संचालित की गईं। इसके तहत गांवों में शौचालयों का निर्माण अब भी जारी है। वहीं ग्रामीण इलाकों में जल निकासी की समस्या बनी हुई है और जगह-जगह जलभराव के चलते गंदगी से संक्रामक बीमारियों के फैलने की संभावना बनी रहती है।
पांच माह पहले सरकार की ओर से मिशन के फेज टू अंतर्गत ग्राम पंचायतों में मेरा गांव, स्वच्छ गांव अभियान की शुरुआत की। इसके तहत ग्राम पंचायतों के प्रत्येक राजस्व ग्राम में सामुदायिक खाद गड्ढों, सामुदायिक सोख्ता गड्ढों व प्लास्टिक एकत्रीकरण केंद्र का निर्माण कराने का निर्देश दिया। इसके जरिए सामुदायिक व व्यक्तिगत ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन किया जाना है। लेकिन योजना अभी तक पूरी तरह परवान नहीं चढ़ सकी है। खासकर कंपोस्ट गड्ढा के निर्माण को लेकर ही पंचायतें उदासीन बनी हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुल 940 ग्राम पंचायतों में 2103 राजस्व गांवों के सापेक्ष अभी तक महज 1511 कंपोस्ट गड्ढे ही बन सके हैं। जबकि अधिकांश गांवों की गलियां व नालियां जलभराव के कारण बजबजा रही हैं।