बलिया। भले ही चुनाव की तारीखों का ऐलान न हुआ हो, लेकिन गांवों में पंचायत चुनाव की सरगर्मी चरम पर है। मौजूदा ग्राम प्रधानों के खिलाफ शिकायतों से जहां उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं वहीं, अधिकारियों के माथे पर भी चिंता की लकीरें खींच दी हैं। गांवों में आवास, राशन कार्ड, जमीन का पट्टा, शौचालय जैसी सुविधाएं नहीं मिलने पर ग्रामीणों को तहसील या ब्लॉक तक लाने के लिए चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे कई समाजसेवी आगे आ गए हैं।
प्रतिदिन तहसील व ब्लॉक में अधिकारियों के पास शिकायतों का अंबार लग रहा है। सरकार द्वारा हाल ही में गांवों में लाभर्थियों को आवास आवंटित की गई है। आवास आवंटन होते ही गांवों में चुनावी बुखार सिर पर चढ़ कर बोलने लगा है।
पंचायत चुनाव की तैयारी में लगे संभावित उम्मीदवार प्रधानों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पांच वर्ष तक सोए संभावित उम्मीदवार लोगों को अब तक मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने पर मुखर हो गए हैं। उनके लिए समाजसेवी बन सुविधाएं दिलाने का भरोसा दिला रहे हैं। ऐसे फरियादियों को तहसील व ब्लॉक के अधिकारियों के पास लाकर शिकायत कराने में पूरी मदद कर रहे हैं। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रह है गांवों में शिकायतों के दौर बढ़ता ही जा रहा है। ज्यादा शिकायती पत्र पड़ने एवं लोगों के दबाव पड़ने पर अधिकारियों की भी परेशानियां बढ़ गई हैं।