बलिया। जिले के छह तहसीलाें में नवंबर में 23 सौ से ज्यादा जमीन व घरों की रजिस्ट्री हुई है। इसके बाद दाखिल खारिज के लिए फाइलें अटकी हैं।
तहसील के अधिकारियों के न बैठने के कारण दाखिल खारिज की प्रकिया के लिए सवाल खाली रजिस्टर पर दर्ज नहीं हो रहे हैं। इससे दाखिल खारिज की सही तिथि मालूम नहीं चल पा रही है। सदर तहसील में कमरा नंबर 12 तहसीलदार कार्यालय बंद था। 40 मिनट में करीब 13 से अधिक लोग पहुंचे, कार्यालय बंद होने से निराश होकर लौट गए। वह लोग कार्यालय में रखे सवाल खाली रजिस्टर चेक करने आए थे कि उसमें नाम दर्ज हुआ है कि नहीं।
रजिस्टर में दर्ज होने के 35 दिन के बाद दाखिल खारिज होता है। इसकी जानकारी के लिए खरीदार परेशान हैं। कर्मचारी 15 दिसंबर के बाद आने के लिए कह रहे हैं। एसआईआर का काम करने के दबाव के कारण कर्मचारी दूसरे सरकारी काम नहीं निपटा पा रहे। 35 दिन के अंदर आपत्ति न होने पर होता है दाखिल खारिज
: शासन ने रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज (प्रॉपर्टी म्यूटेशन) की प्रक्रिया को अब ऑनलाइन कर दिया है। पहले यह काम राजस्व विभाग के दफ्तरों में जाकर ही होता था। अब यह पूरा सिस्टम डिजिटाइज होने से लोग घर बैठे ही जमीन को अपने नाम दर्ज करा सकते हैं। रजिस्ट्री के बाद फाइल ऑनलाइन संबंधित तहसील कार्यालय में चली जाती है।
तहसील कार्यालय के सवाल खाली रजिस्टर पर नाम व नंबर चढ़ता है।
उक्त नंबर विक्रेता के मोबाइल नंबर पर कॉल जाती है। नाम दर्ज होने के 35 दिन के अंदर आपत्ति नहीं पड़ती है तो खरीदार का दाखिल खारिज हो जाता है। भूमि पर कानूनी स्वामित्व प्राप्त होता है और आगे किसी विवाद या खतौनी से संबंधित कार्य में सुविधा मिलती है।