जिला महिला चिकित्सालय में इन दिनों एनेस्थीसिया के डॉक्टर के अभाव में ऑपरेशन नहीं हो रहे। ऐसे में महिला डॉक्टरों ने ऑपरेशन करने से हाथ खड़ा कर दिए हैं। नतीजन, मरीजों को प्राइवेट चिकित्सालय में आपरेशन कराना मजबूरी हो गई है। उधर, जिला चिकित्सालय में भी कभी-कभी आपरेशन हो रहा है। जबकि सीएचसी व पीएचसी पर भी आपरेशन नहीं हो रहे।
जनपद में चार एनेस्थिसिया चिकित्सक थे। जिनमें से डॉ. जीसी मौर्या को शासन ने सीएमओ बनाकर गाजीपुर में तैनात कर दिया। इसके बाद जिले में तीन एनेस्थिसिया चिकित्सक बचें। जिनमें डा. दीपक शाह की तैनाती जिला अस्पताल में है, जबकि दूसरे चिकित्सक डा. एनएन वर्मा की तैनाती जिला कारागार में। जबकि वहीं डा. गुंजन कुमार किसी अन्य सीएचसी पर तैनात हैं।
जबकि जिला महिला चिकित्सालय में कोई एनेस्थिसिया चिकित्सक की तैनाती स्थाई रूप से नहीं है। जिसके चलते महिला चिकित्सालय को जिला अस्पताल या सीएमओ के अंदर में मौजूद एनेस्थिसिया चिकित्सक के सहारे सीजर करना पड़ता था। लेकिन पिछले माह जिला चिकित्सालय में एनेस्थिसिया चिकित्सक के लापरवाही से मरीज के मौत के बाद लोगों ने जिला चिकित्सालय में आपरेशन कराना बंद कर दिया है।
उधर, महिला चिकित्सालय में जेल के डाक्टर के समय से नहीं पहुंचने के कारण एक दिसम्बर से महिला चिकित्सालय में डाक्टरों ने आपरेशन करना बंद कर दिया है। जिससे मरीजों को प्राइवेट चिकित्सालय में आपरेशन कराना पड़ रहा है। ऐसे में जहंा गरीब मरीजों की जेबें ढीलीं हो रहीं हैं वहीं प्राइवेट अस्पताल वाले उनकी मजबूूरी का फायदा उठा कर चांदी काट रहे।