बलिया। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में चुके गए सात विधायकों में एक धनंजय कन्नौजिया का टिकट कटने से वो मैदान में नहीं उतरे थे। शेष छह विधायक दमदारी के साथ विधानसभा चुनाव-2022 में ताल ठोंक रहे थे। इसमें मात्र एक विधायक रसड़ा से उमाशंकर सिंह अपनी विधायकी बचाने में कामयाब रहे हैं। अन्य सभी को चुनावी दंगल में चित होना पड़ा है।
विधानसभा चुनाव 2017 में जनपद के चुने गए सात विधायकों ने छह ने विधानसभा 2022 में किस्मत आजमाई थी। बेल्थरारोड विधानसभा से धनंजय कन्नौजिया का टिकट भाजपा की ओर से काट देने से वो चुनाव मौदान में नहीं उतरे थे। इसके साथ ही बलिया के राज्यमंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला को भाजपा ने चुनाव लड़ने के लिए बैरिया भेज दिया था। यहां से 2017 में विधायक चुने गए सुरेंद्र सिंह भी मैदान में थे। दोनों को चुनाव में नकारते हुए स्थानीय मतदाताओं ने इस बार सपा के जयप्रकाश अंचल को मौका दिया।
बांसडीह विधानसभा से 2017 में विधायक चुने गए नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी को भी मतदाताओं ने पसंद नहीं किया। यहां से केतकी सिंह को मतदाताओं ने विधानसभा भेजा है। सिकंदरपुर विधानसभा से भी विधायक रहे संजय यादव मतदाताओं को दिलों में नहीं उतर सके। यहां से मतदाताओं ने पूर्व मंत्री मो. जियाउद्दी रिजवी को अपना पसंद बनाई। बेल्थरारोड से मतदान से पहले ही नया चेहरा मिलना तय हो गया था। मतदाताओं ने पीसीएस अधिकारी रहे हंसू राम पर अपना दांव लगाया है। फेफना विधानसभा से राज्य मंत्री उपेंद्र तिवारी भी मतदाताओं को दिलों में नहीं उतर पाए। बलिया से भी नए चेहरे के रूप में दयाशंकर सिंह विधानसभा में पहुंचे। एक मात्र रसड़ा विधानसभा से उमाशंकर सिंह अपनी विधायकी बचाने में कामयाब रहे।