बैरिया। अधिकांश परिषदीय विद्यालयों में मानक के विपरीत मध्याह्न भोजन योजना का खाना बच्चों को परोसे जाने का मामला प्रकाश में आया है। इसमें प्रधानाध्यापक, ग्राम प्रधान और बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप लगाया जा रहा है। कई विद्यालयों में भ्रमण कर पूछने पर बच्चों ने बताया कि केवल खिचड़ी विद्यालय में मिल रही है। वह भी गैप देकर। कुछ जागरूक लोगों ने बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों से शिकायत की तो उन्होंने राजनीतिक हस्तक्षेप का हवाला देते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया। वहीं, खंड विकास अधिकारी भी इस मामले में अपनी आंखें बंद किए हुए हैं। बच्चों का पेट प्रधानाध्यापक और ग्राम प्रधान काट रहे हैं और पूरा समाज मूकदर्शक होकर देख रहा है।
शिक्षा क्षेत्र मुरली छपरा, शिक्षा क्षेत्र बैरिया, शिक्षा क्षेत्र बेलहरी और शिक्षा क्षेत्र रेवती के बहुतेरे विद्यालयों में कभी भी बच्चों को दूध या मौसमी फल देने का सिलसिला कोरोना के बाद से शुरू एमडीएम में समाप्त हो गया है। वहीं, हल्दी, नमक, चावल को मिलाकर खिचड़ी की शक्ल देकर बच्चों को खिलाया जा रहा है। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे गरीबी रेखा के नीचे के परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। इसलिए बच्चे या उनके अभिभावक कुछ बोल नहीं पा रहे हैं। क्षेत्र के जागरूक लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बच्चे बहुत प्रिय हैं। उनकी मंशा के विपरीत मीनू का उल्लंघन करके बच्चों को एमडीएम का खाना परोसना सरासर गलत है। लोगों ने जिला अधिकारी, उप जिलाधिकारी और खंड विकास अधिकारी का ध्यान अपेक्षित करते हुए आग्रह किया है कि परिषदीय विद्यालयों में मानक के अनुरूप बच्चों को दोपहर का खाना मिले। इसके लिए उन्हें उचित कार्रवाई करनी चाहिए।