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Ballia News: ओपीडी में एक चिकित्सक दो सौ से ज्यादा मरीजों का कर रही इलाज

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जिला महिला अस्पताल परिसर में जांच रिपोर्ट का इंतजार करती महिला मरीज।संवाद
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बलिया। जिला महिला अस्पताल में चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। ओपीडी में सिर्फ एक महिला चिकित्सक पर दो से तीन सौ मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी है। चिकित्सकों की कमी से ग्रामीण क्षेत्रों से बेहतर इलाज की आस में आने वाली गर्भवती महिलाओं को निराश लौटना पड़ रहा है। ओपीडी के बाहर लंबी लाइन लगने के कारण जांच रिपोर्ट दिखाने में परेशानी उठानी पड़ रही है। चिकित्सक के उठ जाने के कारण निराश लौटना पड़ रहा है। जिला महिला अस्पताल में मंगलवार को ओपीडी की तीन सौ से अधिक पर्ची कटी। इसमें महिलाओं के अलावा बच्चे भी शामिल रहे। सीएमएस डॉक्टर सुमिता सिन्हा आजमगढ़ बैठक में शामिल होने गई थीं। डॉक्टर संगम सिंह व दीपिका गुप्ता, डॉक्टर शिल्पी गुप्ता छुट़टी पर थीं। दो अन्य चिकित्सकों का रिन्यूअल नहीं हुआ है। एक चिकित्सक का इंटव्यू होने के बाद जनवरी से आने की उम्मीद है। चिकित्सकों की कमी के कारण किसी तरफ ओपीडी की व्यवस्था चल रही है। ओपीडी में सिर्फ महिला रोग डॉक्टर ऋचा सिंह मरीजों का इलाज कर रही थीं।
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ओपीडी के बाहर करीब 100 से अधिक मरीजों की दो लाइनें लगी थीं। सुरक्षा को लेकर तीन सुरक्षाकर्मी मौजूद रहे। करीब 14 वे महिलाएं लाइन में लगी थीं जो सोमवार को जांच रिपोर्ट नहीं दिखा पाई थीं।
करनई गांव निवासी संगीता ने कहा कि सात माह से गर्भवती हूं, पेट में परेशानी होने के सास के साथ सोमवार को चिकित्सक को दिखाने के लिए आई थीं, भीड़ के कारण 12 बजे के बाद नंबर आया था। डॉक्टर ने जांच लिखा, खून व अल्ट्रासाउंड जांच के बाद ओपीडी में पहुंची तो डॉक्टर डेढ़ बजे के पूर्व चली गई थीं। जांच रिपोर्ट दिखाने के लिए गलन भरी ठंड में सुबह नौ बजे से आना पड़ा। लाइन में लगी हूं थोड़ी देर बाद नंबर आ जाएगा।
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शंकरपुर निवासी माधुरी तिवारी ने कहा कि सुबह नौ बजे तक अस्पताल पहुंच गई थी, उसके बावजूद लाइन में 41 वें नंबर पर थीं, चिकित्सक ने जांच लिखा है। जांच कराने के बाद रिपोर्ट का इंतजार कर रही हूं। मोहनछपरा निवासी आरती ठाकुर ने बताया कि एक घंटे से लाइन में लगी हूं। अभी नंबर नहीं लगा है। अस्पताल की व्यवस्था बहुत खराब है। पहले चार चिकित्सक बैठती थी, अब सिर्फ एक बैठी है। वह भी मरीज देखने में काफी समय ले लगा रही है। हल्दी के हांसनगर निवासी सुनीता राय ने कहा कि ठंड में पेट में बच्चे की हलचल न होने पर बेहतर इलाज के लिए आई थी। एक घंटे से ऊपर से लाइन में खड़ी हूं। अभी और आधा घंटा लगेगा। कम से कम दो चिकित्सकों को ओपीडी में बैठना चाहिए। बहुत परेशानी हुई।
सीटी स्कैन के लिए करना पड़ा काफी इंतजार
जिला महिला अस्पताल में मंगलवार को सीटी स्कैन के लिए गर्भवती व महिला मरीजों को काफी इंतजार करना पड़ा। फेफना निवासी मंजू देवी ने कहा कि सुबह 11 बजे से नंबर लगा है। कर्मचारी ने बताया कि सिर्फ एक डॉक्टर जांच कर रहे हैं, दूसरे चिकित्सक कार्यालय में गए है। दुबहड़ निवासी मंशा गुप्ता ने कहा कि पेट में दर्द होने पर चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड जांच लिखी है। अस्पताल में जांच कराने के लिए भीड़ है। बाहर जांच करा करा कर रिपोर्ट दिखाने ले जा रही हूं। खेजुरी निवासी माधुरी सिंह ने कहा कि चिकित्सक ने खून की जांच लिखी थी, पैथालाजी में रिपोर्ट डेढ बजे देने को बोल रहे थे। एक डॉक्टर ओपीडी में बैठी है, रिपोर्ट आने से पहले वह उठकर चली जाएंगी। इसके लिए बाहर से जांच कराने जा रही हूं। ठंड का मौसम चल रहा है, फिर कल नहीं आ पाऊंगी।
खून जांच रिपोर्ट का इंतजार करती रहीं महिलाएं
जिला महिला अस्पताल के पैथालाजी में जांच संख्या कम होने के बावजूद खून जांच रिपोर्ट एक बजे के बाद मिलती है। गलन भरी ठंड में सुबह जल्द इलाज व जांच की आस में पहुंचने वाली महिला मरीजों को ओपीडी में इलाज व जांच कराने व रिपोर्ट दिखाने में दो बज जा रहा है। अस्पताल परिसर में दोपहर 12 बजे के समय बेंच व फर्श पर करीब 30- 35 महिलाएं जांच रिपोर्ट के इंतजार में बैठी रहीं। तिखमपुर निवासी श्वेता मिश्रा ने बताया कि सुबह आने से कोई फायदा नहीं मिला। नौ बजे जांच कराने पर भी एक बजे के बाद ही रिपोर्ट मिलेगी।
कुछ चिकित्सकों का वॉक इंटरव्यू चल रहा है। जनवरी से चिकित्सकों की संख्या बढ़ेगी, ठंड के कारण मरीजों की संख्या कम है। - डॉक्टर राजेश चंद्र, प्रभारी सीएमएस।
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