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Ballia News: मां कात्यायनी को पीले फूल और शहद का अर्पित किया भोग

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बांसडीहरोड क्षेत्र के मां भगवती मंदिर परिसर में दर्शन-पूजन करते श्रद्धालु।संवाद
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बलिया। चैत्र नवरात्र के छठवें दिन भक्तों ने मंदिर व घरों में मां कात्यायनी की पूजा अर्चना कर उपासना की। शहर से लेकर गांव तक मंदिरों के फाटक खुलते ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। मां कात्यायनी को विवाह प्रेम और शिक्षा की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। वह शक्ति, सौंदर्य और साहस की प्रतीक मानी जाती हैं। भक्तों ने पीले या लाल वस्त्र पहनकर, कलश स्थापना कर मां को हल्दी, पीले फूल और शहद का भोग अर्पित किया। लड़कियों ने शीघ्र विवाह और सुख-समृद्धि के लिए पूजन अर्चन किया।
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शहर के जापलिनगंज दुर्गा मंदिर, गुदरी बाजार, नलकूप कालोनी स्थित दुुर्गा मंदिर व ब्रह्माइन स्थित ब्राह्मणी देवी, शंकरपुर शांकरी भवानी, इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों उजियार मंगला भवानी मंदिर सुरही स्थित नवदुर्गा व कालीमंदिर पर भक्तों ने पूजन-अर्चन किया। इस दौरान भक्तों ने मां को नारियल, चुनरी, फूल-माला, धूप, अगरबत्ती आदि चढ़ाकर मन्नतें मांगी और परिवार के खुशहाल रहने की कामना की। भक्तों ने मां के जयकारे लगाते हुए घंटा-घडियाल बजाए। जिससे मंदिर सहित आसपास का क्षेत्र देवीमय हो गया। आचार्य अरूणेन्द्र मिश्र चुलचुल बाबा ने कहा कि देवी भागवत पुराण के अनुसार इस स्वरूप की पूजा करने से शरीर कांतिमान हो जाता है और गृहस्थ जीवन सुखमय रहता है। मां कात्यायनी की भक्ति से मनुष्य को अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है। रोग, शोक, संताप और भय का नाश होता है। जिनके विवाह में विलंब हो रहा हो या वैवाहिक जीवन में बाधाएं हों, उन्हें विशेष रूप से मां कात्यायनी की उपासना करनी चाहिए।
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