बैरिया तहसील क्षेत्र में आर्सेनिक तथा आयरनयुक्त पानी से निजात दिलाने के लिए बहुत जल्द मझौआ में करीब 800 करोड़ की लागत से सरफेस परियोजना का निर्माण होगा। परियोजना के तहत गंगा का पानी लेकर उसका संशोधन कर बैरिया तथा मुरलीछपरा समेत तहसील क्षेत्र के गांवों में पानी की सप्लाई की जाएगी।
तहसील क्षेत्र में कुल 26 पानी टंकियों से विभिन्न गांवों में पानी की सप्लाई की जाती है। इसमें कोटवा का पानी टंकी खराब होने से दर्जनों गांवो में करीब एक माह से पानी की सप्लाई नहीं हो रही है। वर्तमान में गोविंदपुर, टेंगरही समेत नौ पानी टंकियों का निर्माण चल रहा है, जबकि अन्य नौ प्रस्तावित पानी टंकियों के निर्माण के लिए शासन से स्वीकृति मिल गई थी, लेकिन धन नहीं मिला और अब शासन ने इसे अस्वीकृत कर दिया है।
विभागीय अधिकारी की मानें तो शासन ने पानी टंकी का निर्माण न कराकर अब गंगा व घाघरा नदी के आसपास सरफेस वाटर प्रोजेक्ट के तहत पानी सप्लाई करने की योजना बनाई है। जहां भी आर्सेनिक व आयरनयुक्त पानी की शिकायत है, उस क्षेत्रो में इसी योजना के तहत लोगों तक शुद्ध पेयजल पहुंचेगा। इसका असर यह होगा कि आर्सेनिक युक्त पानी पीने से जहां लोग गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो जाते थे, उसमें भी कमी आएगी। शुद्ध पेयजल मिलने से काफी हद तक लोगों को राहत मिलेगी।
क्या है सरफेस पाइप पेयजल योजना=
सरफेस पाइप पेयजल योजना के तहत नदी से पानी लेकर उसे फिल्टर के माध्यम से शुद्ध किया जाएगा। उसके बाद पानी टंकी में जरिये घरों में आपूर्ति की जाएगी।
तहसील क्षेत्र में नए प्रस्तावित पानी टंकी के निर्माण को शासन स्तर से निरस्त कर दिया है। अब गंगा व घाघरा किनारे सरफेस वाटर प्रोजेक्ट स्थापित किया जाएगा। आर्सेनिक प्रभावित इलाकों में इसी परियोजना से पानी की सप्लाई की जाएगी। - फणिन्द्र राय, अधिशासी अभियंता बलिया, जलनिगम