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अब कोटेदार वसूलेंगे बिजली बिल

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बलिया। जिले में बिजली उपभोक्ताओं को बिजली बिल जमा करने का एक और माध्यम मिल गया हैं। अब उपभोक्ता अपने नजदीकी कोटेदारों के पास भी बिजली बिल जमा कर सकेंगे। कोटेदार ई-पॉस मशीनों की सहायता से बिल जमा करेंगे। इसके लिए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम ने खाद्य आपूर्ति विभाग के साथ मिलकर तानाबाना बनना शुरू कर दिया है, जिसके तहत बिल वसूली के तौर तरीकों के साथ-साथ भविष्य की रणनीति भी तैयार की जा रही है। यह कदम बिजली उपभोक्ताओं की सहूलियत और बकायेदारी कम करने के लिए उठाया गया है।
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इसके लिए बीते शनिवार को जिले के सभी कोटेदारों के साथ जिला पूर्ति अधिकारी कृष्ण गोपाल पांडेय और बिजली विभाग के सब डिविजनल अधिकारियों के बीच साझा रणनीति बनी। बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि कोटेदारों को बिल जमा करने के लिए ई-पॉस मशीन के साथ बकायदा ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसमें कोटेदारों को बिजली बिल जमा करने के तरीके के बारे में जानकारी दी जाएगी। ऑनलाइन पेमेंट और ग्रामीण क्षेत्र में सहकारी समितियों में बिजली बिल जमा करने की सुविधा पहले ही दी जा चुकी है। इसके बाद भी भारी संख्या में उपभोक्ता नियमित बिजली का बिल नहीं जमा करते हैं। ऐसे उपभोक्ताओं को बिजली का बिल जमा करने के लिए अफसर लगातार प्रेरित कर रहे हैं। अब कोटे की दुकानों पर बिजली का बिल जमा करने की सुविधा मिलने से अफसरों को उम्मीद है कि ज्यादातर लोग नियमित रूप से बिल जमा कर देंगे। इसके अलावा उपभोक्ताओं से बिल जमा करने के लिए फोन पर अपील की जा रही है।
प्रति बिल मिलेगा 16 रुपये कमीशन
बिजली का बकाया बिल जमा करानें पर ग्रामीण क्षेत्र के कोटेदार को 16 और शहरी कोटेदारों को 12 रुपये प्रति बिल कमीशन बिजली विभाग द्वारा दिया जाएगा। इसमें कुछ हिस्सा संबंधित कंपनी को भी जाएगा। आपूर्ति विभाग का प्रयास है कि सरकार की इस पहल से कोटेदारों को जोड़कर उनकी आय में वृद्धि की जाए।
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बिल जमा करने के यह है माध्यम
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के बिलिग काउंटर
ऑनलाइन बिल भुगतान
पेटीएम, ई-वॉलेट, यूपीआई
महिला स्वयं सहायता समूह
सहकारी समितियां
अब कोटेदार के यहां भी जमा होगा बिजली बिल
राजस्व वसूली और उपभोक्ताओं की सहूलियत के लिए देहात क्षेत्रों में कोटेदारों को भी बिजली बिल जमा करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके लिए उन्हें ई-पाश मशीन के साथ बुलाकर प्रशिक्षण दिया जाएगा। कोटे की दुकानों पर बिजली का बिल जमा करने की सुविधा मिलने के बाद उपभोक्ताओं को राहत होगी। जिले के अधिकांश राजकीय सस्ते गल्ले के दुकानदार इस योजना को अपनाने के मूड में हैं। वह इसे अतिरिक्त आय के तौर पर देख रहे हैं। - कृष्ण गोपाल पांडेय, जिला पूर्ति अधिकारी
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