पंदह। गांव का प्रधान बनने का सपना देखने वालों के लिए इस बार लोकतंत्र का सफर पहले से कहीं अधिक महंगा होने जा रहा है। अगले साल होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने नामांकन शुल्क, जमानत राशि और खर्च सीमा में भारी बढ़ोतरी कर दी है।
आयोग ने जो नई दरें तय की हैं, उसमें चुनावी खर्च सीमा में भी 50 हजार से तीन लाख तक का इजाफा किया है। महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्गों को हालांकि पहले की तरह नामांकन व जमानत राशि में 50 प्रतिशत छूट मिलेगी, मगर खर्च सीमा सभी के लिए समान रहेगी। आयोग की इस बढ़ोतरी को ग्रामीण चुनावी टैक्स के रूप में देख रहे हैं।
पिछले चुनाव (2021) में ग्राम प्रधान पद के लिए नामांकन शुल्क 300, जमानत राशि 2000 और अधिकतम खर्च सीमा 75,000 रुपये थी। इसे बढ़ाकर क्रमशः 600, 3000 और 1.25 लाख कर दिया गया है। यानी अब प्रचार से लेकर जनसंपर्क तक, हर चरण में 50–100 प्रतिशत तक अधिक खर्च उठाना पड़ेगा। क्षेत्र पंचायत सदस्य की नामांकन व जमानत राशि प्रधान के बराबर रहेगी, जबकि क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष (ब्लॉक प्रमुख) के लिए दोनों मदों में 100 फीसदी और खर्च सीमा में 40 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इस पद के लिए नामांकन शुल्क 2000, जमानत राशि 10,000 और खर्च सीमा 3.5 लाख तय की गई है, जबकि 2021 में यही सीमा 2.5 लाख थी।
जिला पंचायत स्तर पर खर्च सीमा दोगुनी
2021 की तुलना में 2026 में जिला पंचायत चुनाव सबसे महंगे साबित होंगे। सदस्य पद की खर्च सीमा 1.5 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख कर दी गई है। वहीं अध्यक्ष पद के उम्मीदवार 4 लाख की जगह 7 लाख खर्च के सकेंगे। वहीं नामांकन शुल्क 500 के बदले 1000 और जमानत राशि 4000 के स्थान पर 8000 रुपये जमा करनी होगी। पूर्व प्रधान प्रत्याशी शमशेर बहादुर के अनुसार अब गांव का प्रधान बनना सेवा भावना पर नहीं, जेब की वजन पर निर्भर करेगा। यह फैसला ग्रामीण लोकतंत्र में आर्थिक असमानता को और बढ़ाएगा।